लंदनः Pfizer की कोविड वैक्सीन को लेकर पहले से ही साइड इफेक्ट्स की रिपोर्ट्स आ रही हैं और अब इसी बीच ऑक्सफोर्ड और एस्ट्राजेनेका के कोरोना टीका भी तमाम सवाल उठ रहे हैं. ऑक्सफोर्ड- एस्ट्राजेनेका (Oxford-AstraZeneca) का वैक्सीनेशन भारत सहित और भी तमाम देशों में किया जा रहा है. हालांकि, अब इस वैक्सीन को लेकर हैरान करने वाली रिपोर्ट आई है. रिपोर्ट्स के अनुसार, ऑक्सफोर्ड- एस्ट्राजेनेका के आखिरी ट्रायल में बड़ी गलती हुई है जिसके बाद से इस पर सवाल उठ रहे हैं.
ट्रायल में 1500 लोगों को दी गलत डोज
समाचार एजेंसी रॉयटर्स के हवाले से कहा गया है कि ऑक्सफोर्ड-एस्ट्राजेनेका की वैक्सीन के ट्रायल में शामिल होने वाले करीब 1,500 वॉलंटियर्स को गलत वैक्सीन की डोज दी गई थी. बाद में जब इस गलती का पता लगने के बावजूद उन्हें इस बात से अवगत नहीं कराया गया. रायटर्स के मुताबिक, इसका खुलासा चीफ इंवेस्टिगेटर और ऑक्सफोर्ड यूनिवर्सिटी के प्रोफेसर एंड्रयू जे. पोलार्ड के एक पत्र से हुआ है. जानकारी के अनुसार, जिन लोगों को वैक्सीन की गलत डोज दी गई थी उस घटना को इस तरह से पेश किया गया कि जैसे उन पर अलग-अलग खुराक का ट्रायल किया गया हो.
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नहीं स्वीकारी गई गलती
गौरतलब है कि बीते साल 8 जून को ऑक्सफोर्ड यूनिवर्सिटी के शोधकर्ताओं ने एक पत्र में बताया था कि वैक्सीन की अलग-अलग डोज देने के बाद भी ये अच्छी तरह काम करती है. इस पत्र पर ऑक्सफोर्ड के प्रोफेसर और ट्रायल के चीफ इन्वेस्टिगेटर एंड्रयू जे पोलार्ड ने साइन किया था. रॉयटर्स ने दिसंबर 2020 में अपनी एक रिपोर्ट में बताया था कि स्वयंसेवकों को ऑक्सफोर्ड के शोधकर्ताओं द्वारा मापने की गलती से लगभग आधी खुराक दी गई थी लेकिन प्रोफेसर एंड्रयू पोलार्ड के पत्र में ऐसी कोई इस गलती को स्वीकार नहीं किया गया.
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कई देशों में लग रहा ऑक्सफोर्ड-एस्ट्राजेनेका का टीका
रॉयटर्स की रिपोर्ट के मुताबिक, एस्ट्राजेनेका के एक प्रवक्ता ने इस पर कुछ भी टिप्पणी करने से इनकार कर दिया है. ऑक्सफोर्ड-एस्ट्राजेनेका की वैक्सीन को हाल ही में ब्रिटेन, यूरोपीय संघ और भारत सहित कई देशों ने आपातकालीन उपयोग के लिए मंजूरी दी थी. ब्रिटेन इसे मंजूरी देने वाला पहला देश बना था और चार जनवरी से लोगों को टीका लगाना शुरू किया था. वहीं रॉयटर्स को मिले पत्र ने अब इसके फाइनल ट्रायल को लेकर सवाल खड़े किए हैं. रिपोर्ट के मुताबिक, वॉलंटियर्स से बात छिपाने के लिए उन्हें इस बात की भी जानकारी नहीं दी गई कि इस आधे-अधूरे डोज से उन्हें किस तरह का खतरा हो सकता है.

