मॉस्को: विपक्ष के नेता एलेक्सी नवालनी (Alexei Navalny) को कथित तौर पर जहर देने के मामले में यूरोपीय संघ (European Union) द्वारा रूसी सरकार (Russian government) की कठोर आलोचना के बाद रूस ने यूरोपीय संघ के कई प्रतिनिधियों पर यात्रा प्रतिबंध (travel bans) लगाने का फैसला किया है.
रूस के विदेश मंत्रालय ने कहा है कि क्रेमलिन ने ‘यूरोपीय संघ के सदस्य राज्यों और संस्थानों के प्रतिनिधियों की उस लिस्ट को बढ़ाने का फैसला किया है, जिन्हें रूसी संघ में प्रवेश न करने दिया जाए.’
रूसी सरकार ने ये प्रतिबंध यूरोपीय संघ के 3 देशों के कई वरिष्ठ राजनयिकों को तलब करने के बाद लगाया है. ये वो देश हैं, जिन्होंने अगस्त में उन दावों का समर्थन किया था, जिनमें कहा गया था कि क्रेमलिन ने नवालनी को नोविचोक जहर दिया है.
इन देशों के प्रतिनिधियों को किया तलब
रूसी सरकार ने 3 देश जर्मनी, फ्रांस और स्वीडन के प्रतिनिधियों को तलब किया है, जिनका संबंध ‘यूरोपीय संघ के रूस-विरोधी प्रतिबंधों’ से है.
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एक दिन पहले ही नवालनी ने दावा किया था कि रूसी एजेंट ने यह स्वीकार किया है कि संघीय सुरक्षा सेवा (FSB) ने उसके अंडरवियर में जहर रखकर उसे मारने की कोशिश की थी. हालांकि, नवालनी के इन दावों को FSB के अधिकारियों ने सिरे से खारिज कर दिया है. उन्होंने इन दावों को पूरी तरह गलत करार दिया है. साथ ही नवालनी पर आरोप लगाया है कि वे क्रेमलिन पर आरोप लगाने के लिए विदेशी खुफिया सेवाओं की सहायता ले रहे हैं. .
मंगलवार को रूसी राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन के प्रवक्ता दिमित्री पेसकोव ने भी नवालनी को एक ‘बीमार’ आदमी कहा, जिसे ‘पीड़ित होने का भ्रम’ है. साथ ही कहा कि उनमें मैगालोमैनिया के लक्षण हैं, यानी कि ऐसी स्थिति जिसमें व्यक्ति को ज्यादा से ज्यादा शक्ति पाने की महत्वाकांक्षा होती है.
क्रेमलिन ने भी विपक्षी नेता पर हमला बोलते हुए कहा कि वह अधिकार और शक्ति पाने की मनोवैज्ञानिक समस्या से ग्रस्त हैं.