साइकिल से राम लला के दरबार जा रहे दिव्यांग के हौसलों को सलाम

कर खुदी को इतना बुलंद की खुदा बंदे से पूछे बता तेरी रजा क्या है,,, ये लाइनें महाराष्ट्र के वर्धा के रहने वाले गोपाल पवार पर बिल्कुल सटीक बैठती हैं। 2012 में गोपाल एक सड़क दुर्घटना में अपना एक पैर खो बैठे। लेकिन साइकलिंग का शौक नहीं छूटा। गोपाल ने तय किया कि वे महाराष्ट्र से प्रयाग और अयोध्या तक की यात्रा खुद साइकलिंग कर पूरी करेंगे।

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31 जनवरी को गोपाल अपने घर से 900 किलोमीटर की यात्रा पर निकल पड़े। वे जहां से भी गुजरते हैं लोग उन्हें देखते रह जाते हैं। क्योंकि ऐसा हौसला उनमें भी नहीं जिनके दोनों पैर हैं। गोपाल देर रात शुक्रवार देर रात रीवा पहुंचे और शनिवार सुबह प्रयाग मार्ग से निकल गए।गोपाल बताते हैं कि मैं 2012 में वर्धा में बाइक चलाते वक्त एक सड़क दुर्घटना का शिकार हो गया।

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डॉक्टरों ने कहा कि कोई दूसरे उपाय नहीं है। दाहिनें पैर को काटकर अलग करना पड़ेगा। तब से एक कृत्रिम राडनुमा पैर सहारे के लिए लगा रखा है। लेकिन मैंने तय किया कि मैं खुद को आम लोगों की तरह ही स्वस्थ्य और फिट मानकर चलूंगा।

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आज मैं लंबी साइकिल यात्रा में हूं। जहां से निकल रहा हूं लोगों का भरपूर प्यार और मार्गदर्शन मुझे मिल रहा है। मैं इस यात्रा को पूरा करने के बाद आगे भी इस तरह की यात्राएं करता रहूंगा।

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