Scientists develop coronavirus risk calculator to determine who should get vaccine first | ये Calculator बताएगा किसे पहले लगनी चाहिए Corona वैक्सीन, वैज्ञानिकों को मिली सफलता

वॉशिंगटन:  कोरोना वायरस (Coronavirus) के खिलाफ जंग में वैक्सीन को लेकर आ रहीं खबरों के बीच वैज्ञानिकों ने एक ऐसा कैलकुलेटर विकसित किया है, जिसकी मदद से यह पता लगाया जा सकेगा कि किसे टीकाकरण में प्राथमिकता दी जानी चाहिए. जॉन्स हॉपकिंस ब्लूमबर्ग स्कूल ऑफ पब्लिक हेल्थ (Johns Hopkins Bloomberg School of Public Health)  के शोधकर्ताओं ने कोरोना वायरस मॉर्टैलिटी रिस्क कैलकुलेटर (Coronavirus Mortality Rate Risk Calculator) बनाया है और उनका मानना है कि वैक्सीन के सही इस्तेमाल में ये बेहद सहायक साबित होगा.  

ऐसे करता है विश्लेषण
वैज्ञानिकों का कहना है कि कोरोना वैक्सीन (Corona Vaccine) के पूरी तरह उपलब्ध होने पर कैलकुलेटर की मदद से यह पता लगाया जा सकेगा कि किस आयुवर्ग या समूह के लोगों को टीकाकरण में प्राथमिकता दी जाए. कैलकुलेटर किसी देश की पहले से मौजूद स्थिति और सोशियो-डेमोग्राफिक आंकड़ों का विश्लेषण करके परिमाण पेश करता है.

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इस गणना पर आधारित हैं Results
फिलहाल कैलकुलेटर का उपयोग अमेरिका में किसी व्यक्ति के कोरोना वायरस से मरने के जोखिम का अनुमान लगाने के लिए किया जा रहा है. वैज्ञानिकों ने इसमें कुछ संशोधन किए हैं, जिसके बाद इसका इस्तेमाल यह पता लगाने के लिए भी किया जा सकेगा कि टीकाकरण में किसे प्राथमिकता दी जानी चाहिए. इस कैलकुलेटर के परिणाम उस गणना पर आधारित होते हैं, जो लोगों की उम्र, लिंग, सोशियो-डेमोग्राफिक कारकों और विभिन्न बीमारियों के आधार पर COVID-19 मृत्यु दर का पता लगाती है.  

मौतों के बारे में करता है आगाह
जॉन्स हॉपकिंस ब्लूमबर्ग स्कूल ऑफ पब्लिक हेल्थ के प्रोफेसर और कैलकुलेटर बनाने वाली टीम के प्रमुख वैज्ञानिक निलांजन चटर्जी (Nilanjan Chatterjee) ने कहा कि ‘कोरोना वायरस मॉर्टैलिटी रिस्क कैलकुलेटर (Coronavirus Mortality Risk Calculator) के बेहतर परिणाम सामने आएंगे और इससे टीकाकरण के लिए उस वर्ग को पहचाने में मदद मिलेगी, जिसे सबसे पहले वैक्सीन की जरूरत है. उन्होंने आगे कहा कि मौजूदा इस्तेमाल के दौरान कैलकुलेटर संवेदनशील समूहों में मृत्यु दर का एक आंकलन तैयार करता है और ऐसी मौतों के बारे में आगाह करता है, जिन्हें रोका जा सकता है.

तैयार की Intelligent Guide
इसके अलावा, वैज्ञानिकों ने एक इंटेलीजेंट गाइड भी बनाई है, जिसकी मदद से लोग संभावित खतरों का पता लगा सकते हैं. चटर्जी ने बताया कि मधुमेह जैसे रोग से पीड़ित लोग यह जानते हैं कि उन्हें इस तरह के खतरे हो सकते हैं, लेकिन हमारी इंटेलीजेंट गाइड की मदद से वे इसका व्यापक आकलन कर पाएंगे. इससे उन्हें भविष्य में होने वाली परेशानियों को समझने और उनका मुकाबला करने में मदद मिलेगी.

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