Sukhbir Singh Badal says It is very unfortunate that the concerns of farmers were not considered – सुखबीर सिंह बादल ने कहा- बहुत दुर्भाग्यपूर्ण है कि किसानों की चिंताओं पर विचार नहीं किया गया

सुखबीर सिंह बादल ने कहा- बहुत दुर्भाग्यपूर्ण है कि किसानों की चिंताओं पर विचार नहीं किया गया

सुखबीर सिंह बादल (फाइल फोटो)

चंडीगढ़:

शिरोमणि अकाली दल (शिअद) प्रमुख सुखबीर सिंह बादल ने शुक्रवार को कहा कि यह ‘‘बहुत दुभाग्यपूर्ण”है कि भाजपा नीत केंद्र सरकार ने कृषि से संबंधित तीन विधेयकों पर किसानों की चिंताओं पर विचार नहीं किया. उन्होंने कहा कि उनकी पार्टी किसानों की आशंकाएं सरकार के संज्ञान में लेकर आई थी. साथ ही, भाजपा के साथ गठबंधन अब भी जारी रखने के विषय पर उन्होंने कहा कि पार्टी नेतृत्व जल्द ही बैठक करेगा और इस बारे में कोई अंतिम फैसला करेगा. बादल ने संसद में विधेयकों के खिलाफ मतदान नहीं करने को लेकर कांग्रेस की भी आलोचना की.

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उन्होंने लोकसभा में विधेयकों पर मतदान के दौरान विपक्षी पार्टी के सदन से वाकआऊट कर जाने के संदर्भ में यह बात कही. उल्लेखनीय है कि पंजाब में कांग्रेस की सरकार है. इन विधेयकों के जरिये किसानों के लिये फसल की बेहतर कीमत सुनिश्चित करने को लेकर कृषि उपज की बिक्री से जुड़े नियमों को समाप्त करना है. कई किसान संगठनों और विपक्षी दलों ने कहा है कि ये कदम फसल की ‘‘न्यूनतम समर्थन मूल्य ” (एमएसपी) व्यवस्था को तहस-नहस करने की दिशा में हैं. बादल की पत्नी हरसिमरत कौर बादल ने बृहस्पतिवार को नरेंद्र मोदी सरकार से इस्तीफा देते हुए कहा था कि उसने विधेयक को लेकर प्रकट की गई चिंताओं पर गौर नहीं किया.

बादल ने पीटीआई-भाषा से टेलीफोन पर कहा, ‘‘यह बहुत दुर्भाग्यपूर्ण है. ” हरसिमरत ने चार पृष्ठों के अपने इस्तीफे में कहा कि उन्होंने विधेयक का रूप दिये गये कृषि अध्यादेशों को लेकर किसानों की चिंताओं पर विचार करने और उनका समाधान करने के लिये केंद्रीय मंत्रिमंडल को मनाने की कोशिश की थी. उन्होंने लिखा, ‘‘मुझे यही आश्वासन दिया जाता रहा कि चूंकि अध्यादेश एक अस्थायी व्यवस्था होती है इसलिए संसद में इस मुद्दे को विधान का रूप देते समय मेरी चिंताओं और अनुरोध का हल कर दिया जाएगा. ” शिअद ने लोकसभा में आवश्यक वस्तु (संशोधन) विधेयक, किसान उत्पाद व्यापार एवं वाणिज्य (प्रोत्साहन एवं संवर्द्धन) विधेयक, और मूल्य आश्वासन पर किसान (सशक्तिकरण एवं संरक्षण) समझौता तथा कृषि सेवाएं विधेयक के खिलाफ लोकसभा में मतदान किया.

शिअद प्रमुख एवं फिरोजपुर से सांसद बादल ने कहा कि उन्होंने किसानों की चिंताएं दो महीने तक सरकार के संज्ञान में लाने की कोशिश की थी. उन्होंने कहा, ‘‘मैं प्रत्येक किसान संगठन और किसान नेता से मिला. हमारी कोशिश यह थी कि उनके जो कुछ भी सुझाव हैं उन्हें इस विधेयक में शामिल किया जाना चाहिए. ” बादल ने कहा, ‘‘लेकिन वे(सरकार) इस पर राजी नहीं हुए.”इसके बाद पार्टी ने सरकार को विधेयकों को प्रवर समिति के पास भेजने के लिये मनाने की कोशिश की. उन्होंने हरसिमरत के मंत्रिमंडल से इस्तीफे का जिक्र करते हुए कहा, ‘‘तब अंत में जाकर हमारे पास कोई विकल्प नहीं बचा था. ” उन्होंने पूछा, ‘‘यदि आप किसी व्यक्ति के लिये विधेयक का मसौदा तैयार करते हैं और वह नाखुश है तो ऐसे विधेयक का क्या उपयोग है?”

उन्होंने किसानों से परामर्श करने पर जोर देते हुए यह बात कही. यह पूछे जाने पर कि क्या अकाली दल 25 सितंबर को पंजाब बंद के किसानों के आह्वान का समर्थन करेगा, बादल ने कहा कि उनकी पार्टी किसानों के साथ है, किसानों के लिये और किसानों के लिये लड़ेगी. बादल ने पंजाब के मुख्यमंत्री अमरिंदर सिंह पर ‘‘दोहरा खेल”खेलने का आरोप लगाते हुए दावा किया कि कांग्रेस नेता कृषि पर उच्चाधिकार समिति का हिस्सा थे और उनकी सरकार ने कृषि अध्यादेशों को तैयार करने में हिस्सा लिया था. 

VIDEO: मैं उस कानून का हिस्सा नहीं हो सकती जो किसान विरोधी हो : हरसिमरत कौर बादल

(हेडलाइन के अलावा, इस खबर को एनडीटीवी टीम ने संपादित नहीं किया है, यह सिंडीकेट फीड से सीधे प्रकाशित की गई है।)


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