The legislature should end as soon as the party changes: Ashok Gehlot

खास बातें

  1. कहा कि पार्टी बदलना संसदीय लोकतंत्र के लिए अच्छा नहीं है
  2. निर्वाचित जनप्रतिनिधि पार्टी बदल लेता है तो उसकी सदस्यता खत्म हो
  3. 52वां संशोधन कर दलबदल विरोधी कानून लाए थे राजीव गांधी

जयपुर:

राजस्थान (Rajasthan) के मुख्यमंत्री अशोक गहलोत (Ashok Gehlot) ने शनिवार को कहा कि पार्टी बदलना संसदीय लोकतंत्र के लिए अच्छा नहीं है, इस प्रवृत्ति को रोका जाना चाहिए. संविधान की 10वीं अनुसूची के तहत विधानसभा अध्यक्ष की भूमिका के बाबत चर्चा के लिए आयोजित एक कार्यशाला में गहलोत ने कहा, “अगर कोई निर्वाचित जनप्रतिनिधि पार्टी बदल लेता है तो उसकी सदस्यता खत्म कर दी जानी चाहिए.” बता दें, सन् 1985 में जब राजीव गांधी प्रधानमंत्री थे, 52वां संशोधन कर दलबदल विरोधी कानून लाया गया था और संविधान की 10वीं अनुसूची में इसे जोड़ा गया था. लंबे अरसे तक पार्टी बदलने की घटनाएं थम गई थीं.

इसके साथ ही भ्रष्टाचार उन्मूलन के लिए राजनीतिक पार्टियों की फंडिंग में पारदर्शिता पर जोर देते हुए गहलोत ने कहा कि राजनीतिक पार्टियों को जो धन प्राप्त होता है, वह ‘कालेधन के रूप में’ आता है. कांग्रेस नेता ने कहा कि देश को भ्रष्टाचार मुक्त बनाने के लिए पार्टियों को दान लेने में पारदर्शी तरीका अपनाना चाहिए.

राजस्थान सीएम अशोक गहलोत ने अधिकारियों को दिए निर्देश, कहा- जल्द पूरी की जाएं सरकारी भर्तियां

इससे पहले मुख्यमंत्री अशोक गहलोत ने विभिन्न सरकारी विभागों में लम्बित भर्ती प्रक्रियाओं को जल्द पूरा करने तथा मौजूदा रिक्तियों के लिए नए विज्ञापन शीघ्र जारी करने के निर्देश दिए हैं. गहलोत ने सोमवार को मुख्यमंत्री कार्यालय में विभिन्न विभागों में रिक्तियों और प्रक्रियाधीन भर्तियों की स्थिति के लिए दूसरी समीक्षा बैठक में यह निर्देश दिया. बैठक में उन्होंने कहा कि प्रदेश के युवाओं को राज्य सरकार के विभिन्न विभागों में रिक्त पदों पर नियुक्तियों के अवसर देने के लिए संबंधित विभागों के साथ-साथ राजस्थान लोक सेवा आयोग और कर्मचारी चयन बोर्ड को तत्परता से काम करना चाहिए.

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