पहाड़गढ़ में पानी का संकट विकराल, बूंद-बूंद को तरस रही जनता; जिम्मेदार मौन, टैंकरों पर निर्भर हुए लोगपहाड़गढ़। पहाड़गढ़ मुख्यालय सहित क्षेत्र की 21 ग्राम पंचायतों में पेयजल संकट गंभीर रूप धारण कर चुका है। हालात यह हैं कि ग्राम पंचायत, सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र, पुलिस कॉलोनी, सांदीपनी विद्यालय, छात्रावास, आश्रम तथा अन्य शासकीय कार्यालयों में भी लोगों को पीने के पानी के लिए जूझना पड़ रहा है। स्थानीय लोगों का आरोप है कि कई बार अधिकारियों को समस्या से अवगत कराया गया, लेकिन आज तक कोई ठोस समाधान नहीं निकला।
क्षेत्र की महिलाएं और छोटे-छोटे बच्चे सुबह से ही पानी की तलाश में घरों से निकल जाते हैं। दिनभर का अधिकांश समय पानी की व्यवस्था में ही बीत जाता है। दुबौलिया मोहल्ला, शुक्ला मोहल्ला, मैना बाजार, खटीक मोहल्ला, धोबी मोहल्ला, पुलिस लाइन कॉलोनी, मेहतर मोहल्ला, मुस्लिम मोहल्ला, भारद्वाज गली, खड़ियापुरा, जाजीपुरा और पलिया मोहल्ला सहित लगभग पूरे मुख्यालय में जल संकट बना हुआ है।
स्थानीय लोगों के अनुसार पहाड़गढ़ में पानी का स्रोत पर्याप्त मात्रा में उपलब्ध है, लेकिन व्यवस्थागत खामियों और पाइपलाइन में अवैध डायरेक्ट कनेक्शनों के कारण आम उपभोक्ताओं तक पानी नहीं पहुंच पा रहा है। बताया जाता है कि हनुमान घाटी क्षेत्र में बिछी पाइपलाइन में कई अवैध कनेक्शन होने से जल आपूर्ति प्रभावित हो रही है।
ग्रामीणों का कहना है कि स्थिति इतनी खराब है कि कई परिवारों को निजी टैंकरों से पानी मंगवाना पड़ रहा है, जिसके लिए लगभग 500 रुपये प्रति टैंकर खर्च करने पड़ते हैं। वार्ड क्रमांक 1, 2, 3, 4, 14, 15, 17 और 18 सहित लगभग सभी वार्डों में लोग पानी की समस्या से परेशान हैं। कई स्थानों पर लोग सुबह से रात 11 बजे तक पानी आने का इंतजार करते रहते हैं।
ग्रामीणों ने बताया कि नवंबर माह में पेयजल समस्या को लेकर सर्वे भी किया गया था। पीएचई विभाग के अधिकारियों ने करीब एक किलोमीटर नई पाइपलाइन और छह किलोमीटर साइफन लाइन बिछाने का प्रस्ताव तैयार कर स्वीकृति मिलने की बात कही थी। यह कार्य मार्च से पहले पूरा होना था, लेकिन आज तक निर्माण शुरू नहीं हो सका।
जंगल और दुर्गम क्षेत्र होने के कारण पहाड़गढ़ के कई गांवों में लोगों को एक से दो किलोमीटर दूर से पानी लाना पड़ रहा है। वहीं, सरकार की घर-घर नल जल योजना भी कई क्षेत्रों में दम तोड़ती नजर आ रही है।ग्रामीणों का आरोप है कि जनप्रतिनिधि और जिम्मेदार अधिकारी समस्या के समाधान को लेकर गंभीर नहीं हैं, जबकि भीषण गर्मी में जनता पेयजल संकट से त्रस्त होकर राहत की मांग कर रही है। लोगों ने प्रशासन से तत्काल हस्तक्षेप कर स्थायी समाधान करने की मांग की है।


