नई दिल्ली: भारत के खिलाफ कश्मीर मुद्दे पर पाकिस्तान और तुर्की मिलकर बड़ी साजिश रच रहे हैं, जिसके तहत तुर्की के विश्वविद्यालयों में भारत विरोधी माहौल तैयार किया जा रहा है. भारत सरकार ने पिछले साल जब से जम्मू – कश्मीर राज्य को लेकर आर्टिकल 370 को अप्रभावी बनाया है, तब से तुर्की के राष्ट्रपति एर्दोगन खुद को कश्मीर मुद्दे पर भारत सरकार के विरोध के केंद्र में रखे हुए हैं. इसके तहत तुर्की मे कश्मीर का मामला संयुक्त राष्ट्र की जनरल असेंबली (United Nations General Assembly) में भी उठाया है. तुर्की इस मामले में लगातार इसलिए भी आवाज उठा रहा है, ताकि वो खुद को इस्लामिक दुनिया का नेता साबित कर सके.
तुर्की के राष्ट्रपति, सांसद और अन्य नेता तो भारत विरोधी काम लगातार कर ही रहे हैं, लेकिन अब तुर्किश संस्थान भारत विरोधी गतिविधियों के नए केंद्र बनते जा रहे हैं, खास कर तुर्की के विश्वविद्यालय. ये संस्थान भारत विरोधी माहौल तैयार करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहे हैं. खासकर पिछले एक साल में तुर्की के विश्वविद्यालयों में भारत विरोधी गतिविधियों में काफी तेजी आई है. जिनमें पाकिस्तानी दूतावास (Pakistani mission in Turkey), पाकिस्तान समर्थित एनजीओ भी अपनी अहम भूमिका निभा रहे हैं।
जानकारी के मुताबिक 5 अगस्त 2019 से अबतक तुर्की के विश्वविद्यालयों में कम से कम 30 ऐसे कांफ्रेंस, सेमिनार आयोजित किए जा चुके हैं, जिसके केंद्र में कश्मीर मुद्दा और भारत विरोधी भावनाओं को उभारने की कोशिश रही. तुर्की में आईएसआई के प्रॉक्सी और वर्ल्ड कश्मीर फोरम के जरनल सेक्रेटरी गुलाम नबी फई (Ghulam Nabi Fai) खुद ऐसे आधा दर्जन से अधिक कार्यक्रमों में हिस्सा ले चुके हैं. तो तुर्की में पाकिस्तान के राजदूत सायकस सज्जाद काजी (Syrus Sajjad Qazi) भी ऐसे कार्यक्रमों में हिस्सा लेते देखे जा चुके हैं. यही नहीं, पाकिस्तानी दूतावास और काउंसलेट ने खुद ऐसे कई कार्यक्रम आयोजित किए हैं, जिनके केंद्र में कश्मीर से आर्टिकल 370 को हटाने का मुद्दा रहा. इस्तांबुल के ऐदिन विश्वविद्यालय में ‘जम्मू एंड कश्मीर अंडर द प्रेशर ऑफ फार राइट नेशनलिज्म’ (Jammu and Kashmir under the pressure of far right nationalism), ‘कश्मीर का सवाल’ (The Question of Kashmir) 5 अगस्त से अबतक: अनंत मार्शल लॉ(From 05 August 2019, till today: endless martial law) जैसे कार्यक्रमों का आयोजन पाकिस्तानी दूतावास कर चुका है.
ऐसे कार्यक्रमों में भारतीय मूल के छात्रों को खासतौर पर बुलाया जाता है, जिसमें कश्मीर घाटी के नेता और भारत विरोधी विद्वानों के भाषण होते हैं. पाकिस्तान के कब्जे वाले कश्मीर के राष्ट्रपति सरदार मसूद खान (President of POJK Sardar Masood Khan) खुद ऐसे कई कार्यक्रमों को संबोधित कर चुके हैं.
तुर्का में पाकिस्तान समर्थित संस्थान जैसे कश्मीर सिवितास (Kashmir Civitas) और कश्मीर वर्किंग ग्रुप (Kashmir Working Group) जैसे गुट तुर्की के शैक्षणिक संस्थानों में कई कार्यक्रमों का आयोजन कर चुके हैं, जिसमें भारत विरोधी प्रोपेगेंडा फैलता जाता है. और पाकिस्तान के समर्थन मेें दलीलें रखी जाती हैं.
इस्तांबुल विश्वविद्यालय में उर्दू विभागाध्यक्ष प्रो. हलील टोकर कई ऐसे कार्यक्रमों का आयोजन कर चुके हैं, जिनके केंद्र में कश्मीर रहा. वो खुद ऐसे कार्यक्रमों को संबोधित भी करते रहे हैं. हलील टोकर को पाकिस्तानी प्रॉक्सी माना जाता है और उन्हें साल 2017 में पाकिस्तान के सर्वोच्च नागरिक सम्मान सितारा – ए- इम्तियाज (Sitara-e-Imtiyaz 2017) से पाकिस्तानी सरकार सम्मानित भी कर चुकी है.
तुर्की और पाकिस्तान मिलकर कई ऐसे संस्थानों को पाल पोस रहे हैं, जो भारतीयों के मन में भारत विरोधी भावनाओं को उभार रहे हैं. कश्मीर को लेकर भारत विरोधी भावनाओं को उभारने में लगे ऐसी संस्थाओं में साउथ एशिया स्ट्रेटजिक रिसर्च सेंटर (South Asia Strategic Research Centre -GASAM), तुर्की यूथ फाउंडेशन का रीजनल एक्सपर्ट ट्रेनिग प्रोग्राम (Turkey Youth Foundation’s Regional Expert’s Training Programme-TUGVA’s BUYP), वाईटीबी जैसे की नाम शामिल हैं. इसके अलावा दो ऐसी संस्थाओं का नाम भी इसमें शामिल है, जो पूरी दुनिया में तुर्की के राष्ट्रपति एर्दोगन की इमेज सुधारने के लिए प्रोपेगेंडा चलाते हैं. इनमें पहला नाम तुर्की के रिलीजियस एफेयर्स डायरेक्टरेट्स का तुर्किए दियानत फाउंडेशन (Turkiye Diyanet Foundation) और ह्यूमैनिटेरियन रिलीफ फाउंडेशन (Humanitarian Relief Foundation) है. ये दोनों संस्थान भी तुर्की में भारत विरोधी भावनाओं को उभारने में लगे हुए हैं.
जानकारी तो ये भी है कि वाईटीबी और टीयूजीवीए सीधे तौर पर राष्ट्रपति एर्दोगन के बेटे बिलाल एर्दोगन के इशारे पर चलते हैं, जो एर्दोगन सरकार की भारत विरोधी गतिविधियों में अहम हिस्सा हैं.
पाकिस्तानी खुफिया एजेंसी आईएसआई तुर्की के नेताओं की कश्मीर मुद्दे पर भारत विरोधी भावनाओं को उभारने और उसका फायदा उठाने में लगी है. इसके लिए वो तुर्की सरकार समर्थित संस्थानों की जमकर मदद ले रही है. यही नहीं, आईएसआई तुर्की सरकार के विपक्षी नेताओं के साथ भी संबंध बना रही है, ताकि भविष्य में तुर्की में सरकार बदलती भी है, तब भी वो तुर्की को सामने रखकर भारत विरोधी प्रोपेगेंडाा चलाती रहे.
तुर्की में भारत विरोधी प्रोपेगेंडा के पीछे बड़े लक्ष्य निर्धारित किए गए हैं, जिसके लिए भारतीय मुस्लिमों का मध्यम वर्ग उनका अगला शिकार बन रहा है. इसके लिए शिक्षा को हथियार बनाया जा रहा है और भारतीय छात्रों को पैसे, स्कॉलरशिप देकर अपनी ओर आकर्षित किया जा रहा है. इस काम में दियानत फाउंडेशन के अलावा तुर्की की सरकार सक्रिय भूमिका निभा रही है. जो भारतीय मुस्लिम छात्रों को मुफ्त शिक्षा के साथ वजीफे का लालच दे रही है.

