- आईईडी बनाने की ट्रेनिंग देते हैं पाकिस्तानी आतंकी
- अफगान-तालिबान शांति प्रक्रिया बिगाड़ने की कोशिश
संयुक्त राष्ट्र की एक रिपोर्ट बताती है कि अफगानिस्तान में शांति प्रक्रिया को बेपटरी करने के लिए पाकिस्तान आधारित आतंकी संगठन जैश-ए मोहम्मद (जैश या जेईएम) और लश्कर-ए तैयबा (एलईटी) पूरी तैयारी से जुटे हैं. रिपोर्ट के मुताबिक, ये दोनों आतंकी संगठन पाकिस्तान से आतंकियों को अफगानिस्तान भेजते हैं जो वहां जाकर लोगों को आईईडी डिवाइस (विस्फोटक) बनाने की ट्रेनिंग देते हैं.
जैश और एलईटी भारत में भी आतंक फैलाने के गुनहगार हैं. 2008 में मुंबई हमला और 2019 में पुलवामा हमले की साजिश इन्हीं आतंकी संगठनों ने रची थी. और भी कई आतंकी हमले हैं जिनके इल्जाम इन दोनों संगठनों पर लगे हैं. संयुक्त राष्ट्र की सुरक्षा परिषद में जारी आतंकवाद से जुड़ी एक रिपोर्ट बताती है कि अफगान अधिकारियों ने इसे स्पष्ट किया है कि अफगानिस्तान में कई संगठनों की गतिविधि ऐसी है जो सुरक्षा के लिए गंभीर खतरा हैं.
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रिपोर्ट में कहा गया है कि अफगानिस्तान और तालिबान किसी सीजफायर पर सहमत हों और शांति व सुरक्षा की बात आगे बढ़े लेकिन इस राह में ऐसे संगठन (आतंकी) बहुत बड़ी अड़चन हैं. शांति प्रक्रिया में जो संगठन बाधा पहुंचा रहे हैं, उनमें तहरीक-ए-तालिबान पाकिस्तान, जैश और एलईटी के नाम हैं. इन आतंकी संगठनों की मौजूदगी कुनार, नांगरहर और नूरिस्तान के इलाकों में ज्यादा है. इन इलाकों में ये संगठन अफगान तालिबान के बैनर तले आतंकी वारदातों को अंजाम देते हैं.
आतंकवाद से जुड़ी यह रिपोर्ट बताती है कि जैश और एलईटी अफगानिस्तान में आतंकियों की सप्लाई कराते हैं. ये आतंकी सलाहकार, प्रशिक्षक या विशेषज्ञ के तौर पर काम करते हैं और इस काम में लगे लोगों को आईईडी डिवाइस बनाने की ट्रेनिंग देते हैं. दोनों संगठनों पर कई सरकारी अधिकारियों की हत्या का इल्जाम है. रिपोर्ट में कहा गया है कि एलईटी और जैश में क्रमश: 800 और 200 हथियारबंद लड़ाके हैं. ये लड़ाके तालिबानी आतंकियों के साथ नांगरहर प्रांत में मोहमंद दारा, दुर बाबा और शेरजाद जिले में हिंसक वारदातों को अंजाम देते हैं.