वाशिंगटन डीसी : मिडिल ईस्ट में कूटनीतिक तनाव देखने को मिल रहा है. यहा सरगर्मी बढ़ने की वजह ये भी है कि ये क्षेत्र लंबे समय से ईरान और अमेरिका के सहयोगियों के ध्रुवीकरण का शिकार रहा है. हालांकि इराक को अपवाद माना जा सकता है क्योंकि उसके दोनों से करीबी रिश्ते हैं. इसके बावजूद यहां छद्म युद्ध की आहट से सुपरपावर अमेरिका (US) को बेचैनी महसूस हो रही है.
बगदाद की चेतावनी के बाद फैसला
कई परिस्थितियों और बगदाद की चेतावनी के बाद वाशिंगटन ने अब इराक से अपने राजनयिकों को वापस बुलाने का फैसला ले चुका है. तनाव भरे हालातों के चलते यहां यूएस प्रशासन अपने अमेरिकी मिशन को बंद करने की तैयारी कर चुका है क्योंकि इराक के युद्ध क्षेत्र में बदलने के खतरे के बीच किसी वक्त भी उसके अधिकारियों की वापसी हो सकती है.
अमेरिका द्वारा किसी भी देश में राजनयिक उपस्थिति कम करने का फैसला काफी अहम है, क्योंकि अभी भी इस देश में उसके पांच हजार से अधिक सैनिक तैनात हैं. तनाव की वजह ईरान के साथ होने वाला संभावित टकराव मानी जा सकती है क्योंकि दोनों एक दूसरे के जानी दुश्मन बने हुए हैं और वाशिंगटन कोई बड़ा फैसला ले सकता है.
जानकारों के मुताबिक अमेरिका ने सैन्य कार्यवाई का विकल्प अपनाने के लिए एकदम तैयार है और अमेरिकी राष्ट्रपति चुनाव के चंद हफ्ते पहले ट्रंप प्रशासन किसी भी तरह का अप्रत्याशित फैसला ले सकता है.
अमेरिकी विदेश मंत्री का बयान
अमेरिकी सेकेट्री ऑफ स्टेट माइक पोंपियो (Mike Pompeo) के मुताबिक हफ्ते भर पहले राष्ट्रपति बरहाम सालिह (Barham Salih) की दूतावास से संबंधित फोन कॉल आने के बाद हुए संवाद की वजह से अमेरिका अपने मिशन को बंद करने का फैसला ले रहा है. इस फोन कॉल से जुड़ी रिपोर्ट एक इराकी न्यूज वेबसाइट पर भी प्रकाशित हुई थी.
इराक से अधिकृत जानकारी
इराकी अधिकारियों ने ‘वाल स्ट्रीट जर्नल’ को बताया कि वाशिंगटन पहले ही अपना दूतावास बंद करने की तैयारी कर चुका था. वहीं इराक के उत्तरी कुर्दिस्तान प्रांत की राजधानी एरबिल (Erbil) स्थित अमेरिकी वाणिज्यिक दूतावास को बहाल रहने दिया जाएगा.
(इनपुट एजेंसी से)