Vladimir Putin cautions against regional conflicts, says global development faces risk of collapse – क्षेत्रीय टकरावों में हो रहा इजाफा, इससे अंतराष्‍ट्रीय सुरक्षा व्‍यवस्‍था को खतरा : व्लादिमीर पुतिन

पुतिन ने कहा, टकराव कई गुना बढ़ रहे हैं इससे स्थिति अप्रत्याशित रूप से अनियंत्रित हो सकती है

नई दिल्ली/दावोस:

रूस के राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन (Vladimir Putin)ने  आगाह किया है कि क्षेत्रीय टकरावों (Regional conflicts) में काफी वृद्धि हो रही है और अंतरराष्ट्रीय सुरक्षा व्यवस्था प्रभावित हो रही है, जिससे वैश्विक विकास के पतन और ‘सबके एक दूसरे से लड़ने के लिए तैयार रहने” का खतरा बढ़ रहा है.पुतिन ने विश्व आर्थिक मंच (WEF) के सप्ताह भर के डिजिटल ‘दावोस एजेंडा समिट’ के अपने विशेष संबोधन में तीखे शब्दों का इस्तेमाल किया और बढ़ते सामाजिक विभाजन तथा साझा चुनौतियों के संदर्भ में मौजूदा चुनौतियों और 1930 के दशक के शुरुआती वषों के बीच की समानता को लेकर चेतावनी दी.उन्होंने कहा, “उससे वामपंथी और दक्षिणपंथी – दोनों प्रकार के लोकलुभावनवाद को बढ़ावा मिला है और चरमपंथी गतिविधियों में वृद्धि हुई है.”

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पुतिन ने परमाणु हथियारों से संबंधित समझौते का जिक्र करते हुए कहा कि यह “सही कदम” है, लेकिन टकराव कई गुना बढ़ रहे हैं तथा स्थिति “अप्रत्याशित रूप से अनियंत्रित हो सकती है यदि हम हाथ पर हाथ रखकर बैठे रहते हैं और कुछ नहीं करते.”रूसी जीडीपी (सकल घरेलू उत्पाद) में 2020 में कमी आने के बाद इस साल तीन प्रतिशत की वृद्धि होने का अनुमान है. पिछले साल जीडीपी में कमी आने का मुख्य कारण महामारी से संबंधित प्रतिबंध और वस्तुओं पर आधारित अर्थव्यवस्था में व्यवधान है.पुतिन ने कहा, “अंतर्राष्ट्रीय संस्थान कमजोर होते जा रहे हैं, क्षेत्रीय टकराव बढ़ रहे हैं, वैश्विक सुरक्षा व्यवस्था प्रभावित हो रही है. वैश्विक विकास के पतन होने का खतरा है और सबके एक दूसरे से लड़ने के लिए तैयार रहने का खतरा है.”

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पुतिन ने आईएमएफ के अनुमानों का जिक्र करते हुए कहा कि सार्वजनिक और निजी क्षेत्र के कुल ऋण का स्तर वैश्विक जीडीपी के 200 प्रतिशत के करीब है जबकि कुछ अर्थव्यवस्थाओं में यह 300 प्रतिशत है.उन्होंने कहा कि वास्तविक और आभासी अर्थव्यवस्थाओं के बीच बढ़ती खाई वास्तविक खतरे को उजागर करती है.पुतिन ने कहा कि कोरोना वायरस महामारी से तकनीकी विकास बहुत तेज हो गया है, लेकिन यह प्रक्रिया श्रम बाजार में नए संरचनात्मक बदलाव भी ला रही है. उन्होंने कहा, ‘‘इसलिए, देशों के कुशल प्रयासों के बिना, कई लोगों के बीच नौकरी खोने का खतरा है और यह अक्सर सबसे ज्यादा मध्यम वर्ग को प्रभावित करता है, जो किसी भी आधुनिक समाज का अहम हिस्सा है.उन्होंने कहा कि बढ़ती आर्थिक समस्याएं और असमानता समाज को विभाजित कर रही हैं तथा सामाजिक और नस्लीय असहिष्णुता को बढ़ावा दे रही हैं.

(इस खबर को एनडीटीवी टीम ने संपादित नहीं किया है. यह सिंडीकेट फीड से सीधे प्रकाशित की गई है।)


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