Want peaceful, democratic Afghanistan with rights for women, minorities: Khalid Noor | एक्सक्लूसिव: अफगान वार्ता टीम के सदस्य खालिद नूर ने भारत को बताया अहम् सहयोगी

नई दिल्ली: 25 वर्षीय खालिद नूर (Khalid Noor) उस अफगान वार्ता टीम के सबसे कम उम्र के सदस्य हैं, जो अफगानिस्तान में शांति बहाली के लिए तालिबान के साथ बातचीत करेगी. खालिद ने  ZEE NEWS के सहयोगी चैनल WION के प्रधान राजनयिक संवाददाता सिद्धांत सिब्बल से बात करते हुए कहा कि  तालिबान जानता है कि अफगानिस्तान बदल गया है, लेकिन बातचीत के दौरान हमें यह देखना होगा कि क्या वे वास्तव में इससे इत्तेफाक रखते हैं. यह पहली बार है जब खालिद ने इस विषय पर किसी भारतीय मीडिया नेटवर्क से बात की है.  

उन्होंने कहा कि हम शांतिपूर्ण, स्वतंत्र और लोकतांत्रिक अफगानिस्तान चाहते हैं. साथ ही उन्होंने अफगान शांति प्रक्रिया में भारत की भूमिका को भी महत्वपूर्ण करार दिया. खालिद के पिता Atta Muhammad Noor एक शक्तिशाली अफगान राजनीतिज्ञ थे, जिन्होंने 2016 में एक आतंकी हमले के दौरान मजार-ए-शरीफ में भारतीय वाणिज्य दूतावास की रक्षा के लिए खुद बंदूक उठा ली थी।

WION: अफगानिस्तान युवा आबादी वाला एक अनुभवी राष्ट्र है. हम सार्वजनिक नीति में अधिक युवाओं को देख रहे हैं. अफगानिस्तान के लिए आपकी क्या सोच है?

खालिद नूर: अफगानिस्तान 4 दशकों से अधिक समय से युद्ध झेल रहा है और हमारे लोग इसकी कीमत चुका रहे हैं. हालांकि, हमें अपने लचीलापन पर गर्व है. मेरी पीढ़ी के एक-चौथाई और देश की एक-चौथाई आबादी युद्ध के दौरान पैदा हुई है. लिहाजा इसने हमें अफगानिस्तान के पुनर्निर्माण के लिए मजबूत और प्रतिबद्ध बनाया है.
9/11 के बाद एक नया समाज और एक नई पीढ़ी का उदय हुआ. वह पीढ़ी जो नवीनतम ज्ञान और प्रौद्योगिकी से सुसज्जित है और वास्तव में आज देश में नीति निर्धारण प्रक्रिया के उच्च पदों पर काफी युवा विराजमान हैं.  इतने लम्बे समय में पहली बार युवाओं की नौकरियों में भागीदारी बढ़ी है. अपने देश के लिए मेरा विजन शांतिपूर्ण, स्वतंत्र और लोकतांत्रिक अफगानिस्तान है – जहां मानव अधिकार हों, न्याय हो,  सामाजिक न्याय, स्वतंत्रता हो, जहां हमारे पास अल्पसंख्यकों, महिलाओं के अधिकार हों. ये वे मूल्य हैं जिनकी मैं अपने देश के लिए कल्पना करता हूं.

WION: आप भारत के साथ अपने देश के संबंधों को कैसे देखते हैं?

खालिद नूर: भारत अफगानिस्तान का बहुत पुराना दोस्त है. हम एक जैसी संस्कृति साझा करते हैं और हमारा एक समान इतिहास है. पिछले 19 वर्षों में अफगानिस्तान में भारत की भूमिका हमारे लिए बहुत महत्वपूर्ण रही है. भारत ने एक अच्छी भूमिका निभाई है और पिछले 19 वर्षों में अफगानिस्तान के पुनर्निर्माण में योगदान दिया है. 
अफगानिस्तान के संसद भवन और सलमा बांध के निर्माण में भारत की भूमिका को नहीं भुलाया जा सकता. ये तो महज कुछ उदाहरण हैं, भारत ने अफगानिस्तान के पुनर्निर्माण में अहम् योगदान दिया है. हालांकि, सबसे महत्वपूर्ण योगदान जो मुझे दिखाई देता है वो है छात्रवृत्ति, जो भारत हमारे युवाओं को प्रदान करता है. पिछले कुछ वर्षों में हमारे 65000 से अधिक युवाओं ने भारत से ग्रेजुएशन किया है, जिनमें से अधिकांश को छात्रवृत्ति मिली थी. शिक्षा सबसे बड़ा उपहार है, जो हमें भारत से मिल रहा है. 

WION: जब आप अपनी टीम के साथ तालिबान के साथ बातचीत करेंगे, तो आपका फोकस किस बात पर होगा? क्या आपको लगता है कि तालिबान 1996 की स्थिति में लौट सकता है?

खालिद नूर: तालिबान जमीनी हकीकत को समझने में गलती कर रहा है. हमारे पास एक मजबूत सरकार, मजबूत सुरक्षा बल, मजबूत संस्थान और एक मजबूत सेना है. यहां तक कि अगर तालिबान बलपूर्वक अफगानिस्तान पर कब्जे का प्रयास करता है, तो उसे राष्ट्रीय सेना और अफगानिस्तान के लोगों का सामना करना होगा. यह कहना अवास्तविक होगा कि तालिबान 1996 की स्थिति में वापस आ सकता है. 
जब मैं अपनी टीम के साथ तालिबान के साथ बातचीत के लिए जाऊंगा तो हमारे ऊपर बहुत बड़ा दायित्व होगा, अपने लोगों के संदेश, नए अफगानिस्तान के संदेश, गणतंत्र की रक्षा और अफगानिस्तान के संविधान को ध्यान में रखते हुए बातचीत को आगे बढ़ाने का. विशेष रूप से संविधान का दूसरे अध्याय हमारे लिए बहुत महत्वपूर्ण है, जिसमें मानवाधिकार, महिलाओं के अधिकार, अल्पसंख्यकों के अधिकार, अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता, मीडिया की स्वतंत्रता आदि का जिक्र है. 

ये वे चीजें हैं, जिनके चलते हम तालिबान के साथ वार्ता की मेज साझा करने जा रहे हैं. हम तालिबान को समाज में फिर से संगठित होने, अफगान के लोगों से घुलने-मिलने और एक शांतिपूर्ण जीवन बिताने का मौका दे रहे हैं. 

WION: अफगान शांति प्रक्रिया में भारत की क्या भूमिका है? क्या आपको लगता है, भारत को तालिबान से बात करनी चाहिए?

खालिद नूर: भारत इस क्षेत्र में अहम् भूमिका निभाता है और अफगानिस्तान का एक महत्वपूर्ण भागीदार है. स्थिर अफगानिस्तान का मतलब है, पूरे क्षेत्र का स्थिर होना, इसे ध्यान में रखते हुए किसी भी शांति समझौते को संपूर्ण क्षेत्र और हमारे सहयोगियों की सुरक्षा सुनिश्चित करनी चाहिए और हमारे किसी भी पड़ोसी को शांति समझौते के बारे में कोई चिंता नहीं होनी चाहिए. भारत के संबंध में, जैसा कि उसने अफगानिस्तान और यहां की सरकार का समर्थन किया है, हम उम्मीद करते हैं कि भारत आगे भी अफगानिस्तान के लोगों, अफगानिस्तान गणराज्य का समर्थन करता रहेगा और अफगान के नेतृत्व वाली, अफगान के स्वामित्व वाली और अफगान नियंत्रित शांति प्रक्रिया का भी समर्थन करेगा.

WION: टीम के एक सदस्य के रूप में मास्को, दोहा और पाकिस्तान में आपके अनुभव कैसे रहे. आपको क्या लगता है, कौन स्थिर, समृद्ध अफगानिस्तान के पक्ष में नहीं?

खालिद नूर: मैं कई मौकों पर तालिबान से मिला हूं. मैंने मास्को दोहा और पाकिस्तान में शांति सम्मेलनों में भाग लिया लिया है और मेरे अनुभव बहुत अच्छे रहे हैं.
दूसरों से आमने-सामने मिलने से हमें काफी कुछ सीखने को मिलता है. वैसे भी जब आप तालिबान से बातचीत के लिए जा रहे हैं, तो व्यक्तिगत विश्वास निर्मित करना भी महत्वपूर्ण है. विश्वास उत्पन्न करना सबसे महत्वपूर्ण है, ताकि दोनों पक्ष एक दूसरे पर भरोसा कर सकें और इन संवादों ने तालिबान को बेहतर ढंग से जानने में मदद की है. दोहा में हमने तालिबान के सामने अफगानिस्तान का एक नया चेहरा पेश किया. वे आश्चर्यचकित थे, उन्होंने कहा कि हम जानते हैं कि अफगानिस्तान बदल गया है और हम इसका सम्मान करते हैं. अब हमें यह देखना होगा कि क्या बातचीत के दौरान भी वे इसे स्वीकार करते हैं.

 




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