We are ready to negotiate but …: Farmers react to PMs Movement GV statement – हम बातचीत को तैयार लेकिन…: किसानों ने पीएम के आंदोलन जीवी बयान पर दी प्रतिक्रिया

किसान कृषि कानूनों के खिलाफ दिल्ली की सीमाओं पर आंदोलन कर रहे हैं

नई दिल्ली:

कृषि कानूनों के खिलाफ आंदोलन (Farmers Protest) कर रहे किसानों का कहना है कि वे गतिरोध का हल निकालने के लिए सरकार से बातचीत को तैयार है, लेकिन प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी (PM Modi Rajya Sabha Speech ) के “आंदोलन जीवी”  के बयान का जवाब भी दिया है. 

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किसानों ने कहा कि हमने कभी बातचीत से इनकार नहीं किया है और सरकार ने जब भी बुलाया है तो केंद्रीय मंत्रियों से वार्ता की गई है. किसान नेता शिव कुमार कक्का ने कहा कि हम सरकार से आगे भी वार्ता को तैयार हैं. हालांकि 40 संगठनों वाले संयुक्त किसान मोर्चा में शामिल कक्का ने कहा कि प्रधानमंत्री का बयान किसानों के अपमान जैसा है. कक्का ने याद दिलाया कि यह आंदोलन ही थी जिसने भारत को औपनिवेशिक शासन से मुक्ति दिलाई और इसी वजह से हमें खुद के आंदोलनजीवी होने पर गर्व है.

उन्होंने कहा कि BJP और उसके पहले नाम वाली पार्टियों ने कभी कोई आंदोलन नहीं किया और वे अभी जन आंदोलनों से डरते हैं. अगर सरकार किसानों की मांगती है तो उन्हें खेतों में लौटने की बेहद खुशी होगी. यह सरकार का अड़ियल रुख है, जिससे और ज्यादा आंदोलनजीवी जन्म ले रहे हैं. इससे पहले राज्यसभा में प्रधानमंत्री ने कहा था कि भारत को ऐसे परजीवियों से बचाने की जरूरत है जो आंदोलन पर ही जीते हैं.

पीएम मोदी ने कहा, देश में एक नई संस्था ने जन्म ले लिया है, वे आंदोलन जीवी हैं, जो देश भर में कहीं भी विरोध प्रदर्शन के दौरान नजर आ जाते हैं. कभी आगे और कभी पीछे से. वे कभी विरोध प्रदर्शनों के बिना जी नहीं सकते. वे परजीवी हैं.  हमें ऐसे लोगों को पहचानना है और देश की उनसे रक्षा करनी है.

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केंद्र सरकार पहले भी कहती रही है कि खालिस्तानी या अलगाववादी तत्व किसानों को भटका रहे हैं. पिछले माह उसने सुप्रीम कोर्ट में भी कहा था कि उसके पास ऐसे इनपुट हैं कि खालिस्तानी इन विरोध प्रदर्शनों में शामिल हो गए हैं. सरकार ने आंदोलन को लेकर विदेश से हुए ट्वीट का भी हवाला दिया है. जिनमें रिहाना, अमेरिकी मॉडल अमांडा सेर्नी आदि शामिल हैं. इन सभी ने किसान आंदोलन का समर्थन किया है.

पीएम मोदी ने फॉरेन डिस्ट्रक्टिव आइडियोलॉजी (FDI) यानी विदेशी विध्वंसकारी ताकतों का भी जिक्र किया और कहा कि देश को इनसे बचाने की जरूरत है. किसानों का कहना है कि उनका किसी देश विरोधी संगठन से कोई लेना-देना नहीं है, लेकिन मानवाधिकारों के समर्थन में खड़े दुनिया में समान विचारधारा वाले लोगों की सहानुभूति की उम्मीद रखते हैं.

केंद्र और किसान संगठनों के बीच 11 दौर की वार्ता हो चुकी है और किसानों को कृषि कानूनों की वापसी से कुछ भी कम मंजूर नहीं है.


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