क्या मधुमेह रोगी रागी खा सकते हैं?
रागी, एक पोषक तत्व से भरा अनाज है, जो शुष्क जलवायु और उच्च ऊंचाई में अच्छी तरह से बढ़ता है। मधुमेह रोगियों को आमतौर पर गेहूं और सफेद चावल के लिए उपयुक्त प्रतिस्थापन के रूप में रागी का सेवन करने की सलाह दी जाती है।
क्योंकि यह कोलेस्ट्रॉल और रक्त शर्करा के स्तर को बनाए रखने में मदद करता है। इसके अलावा, रागी में डायट्री फाइबर की उपस्थिति पाचन की गति को मजबूत करती है। साथ ही क्रेविंग को भी कंट्रोल रखती है, परिणामस्वरूप, ब्लड शुगर को नियंत्रण में रखता है।
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शुगर फ्री रागी की बर्फी कैसे बनाये?
स्टेप 1:
रागी की बर्फी बनाने के लिए धीमी आंच पर एक पैन रखें और इसमें थोड़ा सा घी पिघलाएं। घी पिघलने के बाद रागी का आटा डालकर भूनें। जब आटा भूनकर भूरा हो जाए, तो गैस बंद कर दें और 5 से 6 मिनट तक ठंडा होने दें।
स्टेप 2:
इसके बाद पैन को दोबारा धीमी आंच पर रखें। अब इसमें हरी इलायची पाउडर के साथ गुड़ पाउडर डालें और फिर इसे अच्छी तरह से मिलाएं। गुड़ धीरे-धीरे पिघलेगा, लेकिन इस मिश्रण को हिलाते रहें। अगर आपको यह बहुत सूखा लगता है, तो थोड़ा गर्म दूध डालें और ठीक से मिलाएं। जब गुड़ पक जाए तो गैस बंद कर दें।
स्टेप 3:
गैस बंद करने के बाद इसमें फिर से घी डालें। अब एक प्लेट लें और इस पर घी लगाएं, फिर रागी मिश्रण को डालें और इसे कटे हुए सूखे मेवों से गार्निश करें। अब इसे अच्छी तरह से ठंडा होने दें और फिर इसे चौकोर आकार में काट लें। आपकी रागी बर्फी तैयार है।
रागी की बर्फी डायबिटीज के मरीजों के लिए फायदेमंद है। यह कोलेस्ट्रॉल और ब्लड शुगर के स्तर को नियंत्रित रखने में मदद करता है। इसमें डायटरी फाइबर होता है, जो पाचन को भी मजबूत करता है। इसलिए डायबिटीज रोगी भी खास अवसरों और त्योहारों पर डेजर्ट का आनंद ले सकते हैं।
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