What impact can happen to various economies due to coronavirus pandemic, how IMF will help | कोरोना वायरस की मार से कैसे उबरेगी दुनिया की अर्थव्यवस्था? IMF ने बनाया ये प्लान

नई दिल्ली: कोरोना वायरस (Coronavirus) महामारी ने वैश्विक अर्थव्यवस्था को पटरी से उतार दिया है. अब गरीब देशों की मदद के लिए विश्व बैंक (World Bank) और अंतर्राष्ट्रीय मुद्रा कोष पर दबाव बन हा है. यह रिपोर्ट बताती है कि दुनिया किस तरह से इसका मुकाबला कर रही है. ये एक बेहद मुश्किल समय है क्योंकि 1920 के दशक के आखिर और 1930 के दशक के शुरुआत में आई सबसे बड़ी आर्थिक मंदी के बाद ऐसी स्थिति का अनुभव अब तक किसी ने नहीं किया.

कोरोना वायरस ने केवल तीन महीनों में अर्थव्यवस्था के हालात पूरी तरह से बदलकर रख दिया है. जनवरी में IMF (इंटरनेशनल मॉनेटरी फंड) ने कहा कि 2020 में विश्व अर्थव्यवस्था लगभग 3 प्रतिशत बढ़ेगी, और अब इनका कहना है कि अर्थव्यवस्था डूब गई है. आईएमएफ का कहना है कि इस साल वैश्विक अर्थव्यवस्था में 3 फीसदी की कमी आएगी.

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आइए पहले दक्षिण एशिया पर नजर डालते हैं. आईएमएफ के अनुसार, 2020 में विकास दर शून्य होगी, जो 2008 के आर्थिक संकट से भी कहीं ज्यादा खराब है. 1990 के दशक में मुद्रा संकट, ईस्टर और दक्षिण एशिया के सबसे बड़े वित्तीय संकट के दौरान भी अर्थव्यवस्था एक प्रतिशत से थोड़ी ज्यादा हुई थी.

अब लैटिन अमेरिका पर एक नजर. आईएमएफ का अनुमान है कि ये पिछले 50 सालों में होने वाली सबसे खराब मंदी है. दक्षिण अमेरिका में लगभग 33 प्रतिशत लोग अपनी नौकरियां खो सकते हैं. जिसका मतलब ये है कि 200 मिलियन से अधिक लोग बेरोजगार हो सकते हैं. अफ्रीका में भी हालात इसी तरह के हैं. यहां भी अगर कुछ नहीं किया गया तो करीब 50 प्रतिशत लोगों की नौकरियां चली जाएंगी.

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विकसित देशों की अर्थव्यवस्थाओं के लिए तो हालात और भी निराशाजनक लगते हैं. आईएमएफ का अनुमान है कि इस साल इन देशों की अर्थव्यवस्था में कम से कम 6 फीसदी की कमी आएगी. इस तिमाही में यूके की अर्थव्यवस्था में 35 फीसदी तक की कमी आ सकती है. विकसित और विकासशील दोनों अर्थव्यवस्थाओं की बात करें तो कुल उत्पादन घाटा 9 ट्रिलियन डॉलर का हो सकता है.

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अब तक, आईएमएफ ने 8 ट्रिलियन डॉलर जुटा लिए हैं. लेकिन सार्वजनिक आय की कमी है, खासकर गरीब देशों में. विकासशील देशों को सहारा देने के लिए लगभग 2 ट्रिलियन डॉलर की आवश्यकता और होगी. आईएमएफ को पहले ही पांच देशों से 11 बिलियन डॉलर मिल चुके हैं. ये देश हैं- जापान, यूके, फ्रांस, कनाडा और ऑस्ट्रेलिया.

G-20 देशों ने ऋण भुगतान पर रोक लगा दी है. इससे महामारी से लड़ने के लिए गरीब देशों को कम से कम 20 बिलियन डॉलर की मदद मिलेगी.

अब, चीन ने विश्व बैंक से भी ऐसा करने का आग्रह किया है. देर से ऋण भुगतान के मामले में शायद चीन उदाहरण बनकर सामने आए.

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