what to eat to defeat corona: Corona And Testosterone: पुरुष कोरोना से बचने के लिए रोज खाएं ये 6 फूड, महिलाओं की तुलना में पुरुषों के लिए घातक – testosterone hormone is useful to fight against corona virus

नवभारतटाइम्स.कॉम | Updated:

Corona And Testosterone: पुरुष कोरोना से बचने के लिए रोज खाएं ये 6 फूड, महिलाओं की तुलना में पुरुषों के लिए घातकपिछले दिनों कोरोना से संबधित एक महत्वपूर्ण जानकारी सामने आई है। इसके अनुसार कोरोना के शिकार महिलाओं की तुलना में पुरुष अधिक हो रहे हैं। इसकी वजह यह है कि जिन पुरुषों में भी टेस्टोस्टेरॉन हॉर्मोन का स्तर कम होता है, वे उनकी रोग प्रतिरोधक क्षमता कोरोना का मुकाबला नहीं कर पाती और वे गंभीर स्थिति में पहुंच जाते हैं। यहां तक की इस मेल हॉर्मोन की कमी ही बड़ी संख्या में पुरुषों की मृत्यु की वजह बन रही है…

टेस्टोस्टेरॉन का काम

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– हमारे शरीर की रोग प्रतिरोधक क्षमता किस तरह काम करती है और किसी वायरस या बैक्टीरिया के लिए इसका रिऐक्शन कैसा होता है, यह काफी हद तक टेस्टोस्टेरॉन हॉर्मोन पर निर्भर करता है। टेस्टोस्टेरॉन हमारे शरीर में इम्युनिटी से जुड़ी हुई ज्यादातर प्रक्रियाओं में शामिल होता है। वायरल के खिलाफ ऐंटिबॉडीज बनाने में सहायता करना भी इनमें शामिल है।

पुरुषों में टेस्टोस्टेरॉन का स्तर और काम

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-टेस्टोस्टेरॉन हॉर्मोन महिला और पुरुष दोनों के ही शरीर में पाया जाता है। लेकिन यह मुख्य रूप से एक पुरुष हॉर्मोन है क्योंकि यह पुरुषों के यौन जीवन को संचालित करने में मुख्य भूमिका अदा करता है।

-अगर पुरुषों में टेस्टोस्टेरॉन का स्तर कम हो जाए तो उनकी रोग प्रतिरोधक क्षमता सही तरीके से काम नहीं करती है। एक स्टडी के मुताबिक, महिलाओं में 60 पर्सेंट टेस्टोस्टेरॉन ही काफी होता है, वहीं पुरुषों में इसका स्तर 68 पर्सेंट होने पर भी कम माना जाता है।

-ऐसा इसलिए होता है कि 68 पर्सेंट होने पर भी यह हॉर्मोन पुरुषों में ऐंटिइंफ्लामेट्री रेस्पॉन्स नहीं दे पाता। जबकि महिलाओं में 60 पर्सेंट होने पर भी उनका इम्यून सिस्टम सही तरीके से काम कर रहा होता है और ऐंटिबॉडीज बनाने में जुटा होता है।

कोरोना से लड़ने के लिए टेस्टोस्टेरॉन की जरूरत

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-जबसे कोरोना आउटब्रेक हुआ है, तबसे लगातार इस वायरस से जुड़ी स्टडीज हो रही हैं। ऐसी ही एक स्टडी में सामने आया है कि महिलाओं की तुलना में पुरुष इस वायरस से अधिक ग्रसित हो रहे हैं और अधिक गंभीर स्थिति में पहुंच रहे हैं।

-जब महिलाओं और पुरुषों की इस संख्या के बीच के अंतर को ध्यान में रखकर जांच की गई तो सामने आया कि जिन पुरुषों में टेस्टोस्टेरॉन की मात्रा सामान्य से कम है, वे कोरोना की चपेट में जल्दी आ रहे हैं और उनकी बॉडी कोरोना के खिलाफ उस तरह फाइट नहीं कर पाती जैसा कि जरूरत होती है।

बॉडी पर पड़ता अधिक दबाव

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– जब हमारे रेस्पोरेट्री सिस्टम यानी श्वसन तंत्र पर कोरोना का अटैक होता है तो हमारा शरीर इससे फाइट करने के लिए बड़ी मात्रा में साइटोकाइन्स प्रोटीन का उत्पादन करता है। यह प्रोटीन शरीर के अंदर कोशिकाओं के बीच कम्यूनिकेशन का काम करता है।

-कोरोना से फाइट करने के लिए यह शरीर की इम्यून सेल्स को उस जगह पर बुलाने का काम करता है, जहां वायरस ने अटैक किया होता है। लेकिन पेशंट के शरीर में यदि टेस्टोस्टेरॉन का स्तर कम होता है तो इम्यून सिस्टम ठीक से रेस्पॉन्स नहीं कर पाता और साइटोकाइन्स की बढ़ी हुई मात्रा शरीर में बेचैनी बढ़ा देती है।

रक्षा प्रणाली ही बन जाती है जानलेवा

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-शोधकर्ताओं का कहना है कि साइटोकाइन्स की इस बढ़ी हुई मात्रा को आप ‘साइटोकाइन्स स्ट्रोम’ यानी प्रोटीन के तुफान की तरह समझ सकते हैं। कोरोना अटैक के दौरान हमारे शरीर की रोग प्रतिरोधक क्षमता बहुत अधिक तेजी से रेस्पॉन्स करती है और वायरस को हराने में जुट जाती है।

-जब टेस्टोस्टेरॉन का स्तर कम होता है और साइटोकान्स बहुत अधिक बढ़ जाते हैं तो यह स्थिति फेफड़ों को बहुत अधिक नुकसान पहुंचाती है। इसे एक्यूट रेस्पिरेट्री डिस्ट्रेस सिंड्रोम (ARDS) कहते हैं। यह स्थिति इतना खतरनाक रूप ले लेती है कि पेशंट की जान चली जाती है।

इंफ्लुएंजा का भी था ऐसा असर

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-हेल्थ एक्सपर्ट्स और रिसर्चर्स का कहना है कि एवियन इंफ्लुऐंजा (Avian Influenza) का भी शरीर पर ऐसा ही असर हुआ था। इसमें भी महिलाओं की तुलना में पुरुषों की अधिक जान गई थी। इसका कारण यह है कि कोरोना और एवियन इंफ्लुऐंजा (पक्षियों के इंफेक्शन से होनेवाला नजला-जुकाम) दोनों ही जानवरों से इंसान में आनेवाले रोग हैं।

-इस तरह के रोगों को जुनोटिक डिजीज कहते हैं। इस तरह के संक्रमणों में इंसान के शरीर में तेजी से साइटोकाइन्स का उत्पादन शुरू हो जाता है, जो बाद में इंसान के अपने शरीर को नुकसान पहुंचाता है और व्यक्ति की मृत्यु हो जाती है। लेकिन साइटोकान्स का तूफान उन्ही के शरीर में आता है, जिनके शरीर में टेस्टोस्टेरॉन का स्तर आवश्यकता से कम होता है।

ऐसे बढ़ाएं मेल हॉर्मोन

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-शरीर में टेस्टोस्टेरॉन की मात्रा बढ़ाने के लिए कुछ खासा फूड्स को अपनी डेली डायट में शामिल करें। ताकि आपकी रोग प्रतिरोधक क्षमता ठीक से काम करे और आप किसी भी तरह के वायरस से लड़ पाएं।

-काजू, अनार, केला, ऐवकाडो, लहसुन ऐसे फूड्स हैं जो हमारे शरीर में टेस्टोस्टेरॉन हॉर्मोन का स्तर बढ़ाने का काम करते हैं। इसके साथ ही रात के खाने में उड़द की काली दाल का सेवन भी इस मेल हॉर्मोन को बढ़ाने का काम करता है।

-उड़द की काली दाल महादिल होती है। यानी आप इसे किसी भी मौसम में खा सकते हैं। इसलिए गर्मी के मौसम में भी रात के भोजन में काली दाल का सेवन करें। इसमें चपाती भिगोकर खाने से पाचन तंत्र भी ठीक रहता है और भोजन भोजन जल्दी पच जाता है।

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