वाशिंगटन। अगर आप माता-पिता हैं और आपके छोटे-छोटे बच्चे हैं तो जाहिर सी बात है, उन्हें सर्दी खांसी होती ही होगी। और आप उन्हें कफ सीरप जरूर देते होंगे। अगर आप ऐसा करते हैं तो सावधान रहें। कहीं आपके बच्चे की जान न गंवा बैठे। विश्व स्वास्थ्य संगठन ने भारत की फार्मास्युटिकल्स कंपनी के बनाए 4 कफ सिरप को लेकर चेतावीन जारी की है। डब्ल्यूएचओ ने कहा है कि ये प्रोडक्ट मानकों पर खरे नहीं हैं। ये खतरनाक हो सकते हैं। खासतौर से बच्चों स्तेमाल से गंभीर समस्या या फिर मौत का खतरा है। डब्ल्यूएचओ ने कहा कि गाम्बिया में 66 बच्चों की मौत किडनी की हालत बेहद खराब हो जाने की वजह से हुई है। संभव है कि किडनी इसलिए खराब हुई होगी क्योंकि इन सीरप का इस्तेमाल किया था। इसलिए इन बच्चों की मौत हुई हो गई। फिलहाल ये प्रोडक्ट अभी सिर्फ गाम्बिया में पाए गए हैं। इस घटना के बाद से डब्ल्यूएचओ ने मेडिकल प्रोडक्ट अलर्ट जारी किया है। यह न केवल गाम्बिया जैसे देशों, बल्कि भारत के लिए भी बेहद गंभीर है। क्या भारत के कफ सीरप भी खतरनाक हैं? तो इसका जवाब हम देंगे।
जिन कंपाउंड diethylene glycol और ethylene glycol का जिक्र WHO की रिपोर्ट में है, वह कार्बन कंपाउंड है। इसमें न खुश्बू होती है और न ही कलर। ये मीठा होता है। बच्चों के सिरप में सिर्फ इसलिए मिलाया जाता है ताकि वो आसानी से पी सकें।
अलर्ट जारी होने के तुरंत बाद भास्कर ने मेडिकल एक्सपर्ट और अधिकारियों से बातचीत की। पता चला कि जिस कंपनी के सिरप पर सवाल हैं, उसने वेबसाइट बंद कर दी है, ताकि लोगों को ज्यादा जानकारी ना मिल सके।
दैनिक भास्कर की एक रिपोर्ट के अनुसार जिन कंपाउंड जिक्र, वो स्वाद बढ़ाते हैं- शिशु एवं बाल रोग विशेषज्ञ डॉ. विवेक शर्मा ने बताया कि बताया कि जिन कंपाउंड diethylene glycol और ethylene glycol का जिक्र WHO की रिपोर्ट में है, वह कार्बन कंपाउंड है। इसमें न खुश्बू होती है और न ही कलर। ये मीठा होता है। बच्चों के सिरप में सिर्फ इसलिए मिलाया जाता है ताकि वो आसानी से पी सकें।, वह कार्बन कंपाउंड है। इसमें न खुश्बू होती है और न ही कलर। ये मीठा होता है। बच्चों के सिरप में सिर्फ इसलिए मिलाया जाता है ताकि वो आसानी से पी सकें। दवाओं में ये कंपाउंड अधिकतम 0.14 मिलीग्राम प्रति किलो तक मिलाया जा सकता है। 1 ग्राम प्रति किलो से ज्यादा मिलाने पर ये मौत का कारण बन सकता है।
बच्चों पर कैसे होता है इसका असर…
– पहले दो दिन में उल्टी-दस्त, पेट में दर्द। दिमाग सुन्न पड़ने लगता है। इसे माइनर कोमा भी कहा जाता है।
-तीसरे-चौथे दिन किडनी फेलियर हो जाता है। यूरिन पास नहीं हो पाता। ब्लड प्रेशर बढ़ जाता है। हृदय की गति भी अनियमित हो जाती है।
-पांचवें से दसवें दिन तक पैरालिसिस हो सकता है। व्यक्ति डीप कोमा में जा सकता है। मौत भी हो सकती है। अगर इन कंपाउंड के चलते एक बार मरीज गंभीर हो गया, उसे बचा भी लिया गया तो किडनी की समस्या रहती है। उसे डायलिसिस की जरूरत भी पड़ सकती है।
गाम्बिया में कफ सिरप के जिस कंपाउंड से 66 बच्चों की जान गई है वही भारत में भी 33 की जान ले चुका है। इन दवाओं में इस्तेमाल अमेरिका, ऑस्ट्रेलिया और यूरोप में प्रतिबंधित है। लेकिन भारत में भी दो बार इन केमिकल कंपाउंड की वजह से त्रासदी आ चुकी है। 1986 में मुंबई के एक अस्पताल में कई मरीजों को इलाज के दौरान ग्लिसरीन दिया गया था। इसके बाद किडनी फेलियर की वजह से 21 मरीजों की मौत हो गई थी। जांच में पाया गया कि उन्हें दिए गए ग्लिसरीन में कपमजीलसमदम हसलबवस मिला हुआ था। 2020 में चंडीगढ़ पीजीआई के डॉक्टरों ने सेंट्रल ड्रग अथॉरिटी ब्क्ैब्व् को एक कफ सिरप ब्व्स्क्ठम्ैज् की शिकायत की थी। इस कफ सिरप के इस्तेमाल से जम्मू-कश्मीर के उधमनगर के 12 बच्चों की मौत हो गई थी। इस कफ सिरप में भी कपमजीलसमदम हसलबवस मिला हुआ था।
भारत में क्यों नहीं लगाया प्रतिबंध
diethylene glycol और ethylene glycol एक सॉल्वेंट है जिसका इस्तेमाल दवाओं, खासतौर पर सिरप में किया जाता है। मगर इसकी मात्रा प्रति एक किलो में 0.14 मिलीग्राम से ज्यादा नहीं हो सकती।
बच्चों के सिरप में सॉल्वेंट के तौर पर मुख्यतः चतवचलसमदम हसलबवस का इस्तेमाल किया जाता है। मगर इसके मुकाबले कपमजीलसमदम हसलबवस सस्ता पड़ता है। इसी वजह से फार्मा कंपनियां इसका इस्तेमाल करती हैं।
और क्या इस्तेमाल हैं कपमजीलसमदम हसलबवस के यह केमिकल कंपाउंड ऑटोमोटिव इंडस्ट्री, एग्रोकेमिकल्स, पेंट्स में इस्तेमाल होता है। कई खाद्य व पेय पदार्थों में भी स्वाद बढ़ाने के लिए इस्तेमाल होता है।
क्या गाम्बिया वाला सीरप भारत में भी बिकते हैं?
ये प्रोडक्ट केवल गाम्बिया तक सीमित नहीं हैं। गाम्बिया में तो बच्चों की मौतों के बाद इनकी पहचान हुई और पता चला कि इनके कंटेंट जानलेवा हैं। डब्ल्यूएचओ ने आशंका जाहिर की है कि गैरकानूनी और गैरआधिकारिक जरिए से ये सिरप अन्य देशों में भी भेजे गए होंगे। जहां तक भारत की बात है तो जब हमने छानबीन की तो पता चला कि ये सभी कफ सिरप भारतीय बाजार में भी मौजूद हैं। ये मेडिकल वेबसाइट्स के जरिए भी उपलब्ध हैं।


