छत्तीसगढ़ी में पढ़ें: घेरीपईत घोरत रहिबे ते नइ बनय, काबर के…


समय परे मा बात ला लमाना पर जथे, फेर लमावत घानी घलो थोकन बिचार करत चलना चाही. मन के काहे पल्ला भागतेच पाबे, थोरको थीरबांह नइ धरय. हमर अपन सेती होवंय या फेर अउ ककरो सेती घोर घोर के उही उही बात ला नइ लानना चाही.


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