जैविक खाद बनाना हुआ आसान, किसानों को कम लागत में मिलेगा ज्यादा फायदा

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जैविक खाद बनाना हुआ आसान, किसानों को कम लागत में मिलेगा ज्यादा फायदा

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Agriculture News: जदूनंदन प्रसाद वर्मा ने लोकल 18 से बातचीत में कहा कि जीवामृत, वर्मी कम्पोस्ट और वर्मी वॉश जैसी जैविक खाद मिट्टी की गुणवत्ता सुधारने में अहम भूमिका निभाती हैं. इससे फसलों की जड़ें मजबूत होती हैं और पौधों को प्राकृतिक पोषण मिलता है.

बिलासपुर. छत्तीसगढ़ के बिलासपुर जिले के नगर पंचायत मल्हार में जैविक खेती को बढ़ावा देने वाले किसान जदूनंदन प्रसाद वर्मा किसानों को रासायनिक खाद के बजाय जैविक विकल्प अपनाने की सलाह दे रहे हैं. उनका कहना है कि जीवामृत, वर्मी वॉश, वैम माइकोराइजा, वर्मी कम्पोस्ट और लिक्विड ऑर्गेनिक दवाएं फसलों के लिए बेहद लाभकारी साबित हो रही हैं. ये जैविक उत्पाद न केवल मिट्टी की उर्वरकता को बढ़ाते हैं बल्कि धान, भिंडी, बैंगन समेत कई सब्जियों की बेहतर वृद्धि में भी मदद करते हैं. इसके साथ ही बेवेरिया बेसियाना जैसे जैविक कवक आधारित उत्पाद फसलों को हानिकारक कीटों से सुरक्षित रखने में कारगर माने जा रहे हैं. किसानों के बीच अब प्राकृतिक खेती और जैविक खाद का उपयोग तेजी से बढ़ रहा है क्योंकि इससे मिट्टी लंबे समय तक उपजाऊ बनी रहती है और खेती की लागत भी कम होती है.

जदूनंदन प्रसाद वर्मा ने लोकल 18 से कहा कि जीवामृत, वर्मी कम्पोस्ट और वर्मी वॉश जैसी जैविक खाद मिट्टी की गुणवत्ता सुधारने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाती हैं. इससे फसलों की जड़ें मजबूत होती हैं और पौधों को प्राकृतिक पोषण मिलता है.

धान और सब्जियों के लिए लाभकारी
उन्होंने कहा कि ये जैविक खाद धान के साथ-साथ भिंडी, बैंगन और अन्य सब्जियों के लिए भी बेहद फायदेमंद हैं. नियमित उपयोग से फसलें स्वस्थ रहती हैं और उत्पादन में भी सकारात्मक असर देखने को मिलता है.

बेवेरिया बेसियाना से कीट नियंत्रण
वर्मा के अनुसार, बेवेरिया बेसियाना एक प्राकृतिक कवक है, जो कीट नियंत्रण में प्रभावी माना जाता है. इसके बीजाणु कीटों के शरीर पर फैलकर उन्हें नष्ट कर देते हैं, जिससे फसलों को सुरक्षित रखने में मदद मिलती है.

घर पर भी तैयार की जा सकती है जैविक खाद
उन्होंने किसानों को सलाह दी कि गोबर खाद, जीवामृत और वर्मी वॉश जैसी जैविक खाद को ग्रामीण स्तर पर आसानी से तैयार किया जा सकता है. इससे खेती की लागत कम होती है और खेतों की उर्वरता लंबे समय तक बनी रहती है.

About the Author

Rahul Singh

राहुल सिंह पिछले 10 साल से खबरों की दुनिया में सक्रिय हैं. टीवी से लेकर डिजिटल मीडिया तक के सफर में कई संस्थानों के साथ काम किया है. पिछले चार साल से नेटवर्क 18 समूह में जुड़े हुए हैं.


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