लंदनः विश्व भर में चीनी कंपनियों पर बैन लगने का सिलसिला शुरू हो चुका है. भारत द्वारा 59 चीनी ऐप्स पर बैन लगाने के बाद अब विश्व के कई देशों में इस पर विचार चल रहा है. वहीं चीन की प्रमुख टेलीकॉम कंपनी पर भारत द्वारा रोक लगाने के कुछ दिनों बाद ही ब्रिटेन की सरकार ने भी ऐसा कदम उठा लिया है. ब्रिटेन ने हांगकांग के मसले पर जारी तनाव के बीच चीनी कंपनी हुवावे पर 2027 तक बैन लगा दिया है. सरकार ने सभी कंपनियों से कहा कि हुवावे द्वारा 5जी नेटवर्क के लिए दिए गए सभी उपकरणों को हटा लें. भारत के बाद अमेरिका ने भी इस कंपनी से उपकरण लेने पर प्रतिबंध लगा दिया था.
नेशनल सिक्योरिटी काउंसिल की बैठक में फैसला
प्रधानमंत्री बोरिस जॉनसन की अध्यक्षता में हुई नेशनल सिक्योरिटी काउंसिल की बैठक में इस बात का फैसला लिया गया है. सरकार ने ये फैसला नेशनल साइबर सिक्योरिटी काउंसिल की रिपोर्ट के आने के बाद लिया है. हुवावे पर डेटा चोरी और गुप्त सूचनाओं को लीक करने का आरोप है.
संस्कृति सचिव ओलिवर डाउडेन ने कहा कि अमेरिकी प्रतिबंधों के बाद हुवावे की सिक्योरिटी की चिंताएं बढ़ गई हैं. हुवावे की उपस्थिति देश की सुरक्षा के लिए खतरनाक हो सकती है. उन्होंने यह भी कहा कि ब्रिटेन को भरोसा नहीं है कि हुवावे अपने उपकरणों की सुरक्षा को लेकर कोई गांरटी दे पाएगा.
हुवावे ने जताया निर्णय पर खेद
चीनी कंपनी ने हालांकि ब्रिटिश सरकार के फैसले पर दुख जताते हुए कहा है कि वो इस निर्णय की समीक्षा करेगी. इससे कंपनी के यूके में बिजनेस करने पर असर पड़ेगा.
30 जून को अमेरिका ने लगाया था बैन
चीनी टेलीकॉम कंपनी हुवावे पर 30 जून को अमेरिका ने भी बैन लगाया था. US फेडरल कम्युनिकेशन कमीशन ने 5-0 से मतदान कर चीन की टेक कंपनी हुवावे और ZTE को राष्ट्रीय खतरा बताया था. इसके साथ ही अमेरिकी कंपनियों को इक्विपमेंट खरीदने को लेकर मिलने वाले 8.3 अरब डॉलर के फंड को ट्रंप सरकार ने रोक दिया था. अमेरिकी टेलीकॉम रेगुलेटर ने नवंबर में ही इस बाबत 5-0 से मतदान किया था.
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