‘भेड़िया घात लगाता है और फिर खा जाता है’, फौजी वर्दी में दिखे पुतिन तो खौफ में आए पड़ोसी देश; याद आ रहा पुराना कथन

DNA Analysis on Russia Belarus Military Exercise: यूक्रेन के साथ पिछले 3 साल से जारी युद्ध के बीच खास तस्वीरों के जरिए पुतिन ने रूस विरोधी खेमे को एक बड़ा और सख्त संदेश दिया है. पुतिन की ये फोटो और न्यूज दुनिया भर की हेडलाइंस का हिस्सा बनी हुई हैं. असल में पुतिन अपने दल-बल के साथ बेलारूस में चल रहे सैन्य अभ्यास का निरीक्षण करने पहुंचे थे. इस दौरान..पुतिन सेना की वर्दी में नजर आए. पुतिन ने रूस के AIRBORNE TROOPS यानी स्पेशल फोर्सेज़ की तर्ज पर हरे रंग की आर्मी पैंट और उसके ऊपर हरे रंग की  एक जैकेट पहन रखी थी. युद्धाभ्यास में पहुंची रूस की फौजी टुकड़ी से मुलाकात से लेकर रूसी फौज के हथियारों के निरीक्षण तक पुतिन हर जगह मिलिट्री यूनिफॉर्म में ही थे. इसी वजह से कुछ सवाल उठे.

पुतिन ने फौजी वर्दी क्यों पहनी?

पहला सवाल यही था कि सूट पहनने वाले पुतिन ने अचानक फौजी वर्दी क्यों पहनी. क्या ये वर्दी पहनने की वजह युद्धाभ्यास में शामिल सैनिकों को नजदीकी का एहसास कराना था या फिर पुतिन की ये मिलिट्री यूनिफॉर्म रूस विरोधी खेमे के लिए कोई खास संदेश थी.

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पुतिन जैसे कद्दावर नेता कोई भी काम बिना किसी मकसद के नहीं करते. ऐसे नेताओं की BODY LANGAUAGE से लेकर बात करने का तरीका भी बहुत अहम माना जाता है. इसी वजह से बेलारूस में पुतिन की इस मिलिट्री यूनिफॉर्म को डीकोड करना बेहद जरूरी हो जाता है. पुतिन और फौजी ड्रेस का कनेक्शन समझने के लिए आपको पुतिन के राजनीतिक करियर के कुछ अहम हिस्सों को बेहद गौर से जानने चाहिए. 

पहली बार 1999 में दिखे फौजी वर्दी में

सत्ता की कुर्सी पर बैठने के बाद पुतिन को पहली बार वर्ष 1999 में फौजी वर्दी में देखा गया था. ये वो दौर था जब रूस और चेचेन्या के बीच दूसरा चेचेन युद्ध चल रहा था. इस युद्ध में चेचेन विद्रोहियों को रूस ने इतनी बुरी तरह कुचला था कि आज चेचेन्या खुद रूस का सैटेलाइट स्टेट बन गया है. इसके बाद वर्ष 2013 के अंत में पुतिन को फौजियों के साथ मिलिट्री यूनिफॉर्म में देखा गया था. इस बार जब पुतिन ने फौजी वर्दी पहनी तो अगले चार ही महीनों में रूसी फौज ने यूक्रेन से क्रीमिया को छीन लिया था.

पुतिन को तीसरी बार सितंबर 2022 में फौजी वर्दी पहने देखा गया था. ये वो वक्त था जब रूस ने यूक्रेन के डोनबास में रेफरेंडम कराकर डोनेक्स और लुहांस्क को स्वतंत्र क्षेत्र करार दे दिया था. पिछली बार पुतिन ने 12 मार्च 2025 को फौजी वर्दी पहनी थी. तब से लेकर अब तक रूसी फौज लगातार यूक्रेन के औद्योगिक कारखानों पर हमले कर रही है ताकि यूक्रेन की अर्थव्यस्था चरमरा जाए.

क्या नया मिलिट्री एक्शन शुरु करने की है तैयारी?

इसी वजह से माना जाता है कि पुतिन जब जब मिलिट्री यूनिफॉर्म पहनते हैं तो रूस किसी बड़े सामरिक एक्शन को अंजाम देता है. अब पुतिन ने सार्वजनिक तौर पर पांचवीं बार मिलिट्री यूनिफॉर्म पहनी है. सब जानते हैं कि वर्तमान हालात में पुतिन का एक ही विरोधी है और वह अमेरिका की अगुवाई में खड़ा पश्चिमी खेमा. इस खेमे में पुतिन की फौजी वर्दी को लेकर कितनी हलचल मची है. ये आप इस बात से समझ सकते हैं…कि पुतिन के शरीर पर फौजी वर्दी देखने के 24 घंटों के ही अंदर अमेरिकी थिंक टैंक INSTITUTE OF WAR ने पुतिन की वर्दी और इरादों को लेकर एक रिपोर्ट पेश कर दी. इस रिपोर्ट में पुतिन को लेकर क्या आंकलन लगाए गए हैं. ये भी आपको ध्यान से समझना चाहिए.

INSTITUTE OF WAR की रिपोर्ट में साफ साफ लिखा गया है कि पुतिन के निशाने पर अब नाटो के वो सदस्य देश हैं. जो रूसी सीमाओं के करीब स्थित हैं. रिपोर्ट में ये भी दावा किया गया है कि फौजी वर्दी पहनकर पुतिन ने नॉर्वे, पोलैंड और फिनलैंड जैसे उन नाटो सदस्यों को चेतावनी दी है. जो लगातार यूक्रेन को सैन्य मदद दे रहे हैं.

अमेरिकी थिंक टैंक की ये रिपोर्ट सिर्फ एक आंकलन है लेकिन इसे कमतर करके नहीं आंका जा सकता. हाल ही में जिस तरह रूसी ड्रोन पोलैंड तक पहुंच गए थे. उसने पूर्वी यूरोप के नाटो सदस्यों को इस हद तक डरा दिया था कि पोलैंड को नाटो की आपातकालीन मीटिंग बुलानी पड़ी थी. इन सदस्यों के अंदर बैठे पुतिन के डर की दूसरी वजह है वो युद्धाभ्यास. जहां पुतिन फौजी यूनिफॉर्म पहनकर पहुंचे थे. आखिर बेलारूस में हो रहा युद्धाभ्यास पोलैंड और फिनलैंड जैसे देशों की टेंशन क्यों बढ़ा रहा है. ये भी आपको समझना चाहिए.

ये देश हैं पुतिन के निशाने पर

16 सितंबर को यानी आज से चौबीस घंटे पहले इस सैन्य अभ्यास में बेलारूस और रूस की फौज ने परमाणु हथियारों को लॉन्च करने की ड्रिल को अंजाम दिया है. इस ड्रिल के लिए रूस की हाइपरसोनिक मिसाइलों का इस्तेमाल किया गया था. बेलारूस के राष्ट्रपति लुकाशेंको ने खुद बयान जारी करके बताया कि परमाणु हथियारों से जुड़ी ये ज्वाइंट ड्रिल पूरी तरह कामयाब साबित हुई है. 

यही है पूर्वी यूरोप में बैठे नाटो सदस्यों की फिक्र की वजह. इन देशों को डर है कि कही न्यूक्लियर ड्रिल में फौजी वर्दी पहनकर पुतिन ने ये संदेश तो नहीं दिया कि जरूरत पड़ी तो पोलैंड और नॉर्वे जैसे देशों के खिलाफ पुतिन एटमी हथियारों के इस्तेमाल से भी नहीं चूकेंगे क्योंकि पुतिन की फौजी वर्दी और उनके सामरिक एक्शन से जुड़ा इतिहास पूरी दुनिया को पता है. बेलारूस में जब पुतिन मिलिट्री यूनिफॉर्म पहनकर आए थे तो दो और दिलचस्प तस्वीरें सामने आईं. 

अमेरिकी सैनिकों से की मुलाकात

ड़्रिल पूरी होने के बाद जब पुतिन सैनिकों से मिलने गए तो पुतिन ने अमेरिकी टुकड़ी से विशेष तौर पर मुलाकात की. जबकि दूसरे देशों की सैन्य टुकड़ियों को एक साथ मिलाकर पुतिन ने मुलाकात की. जब बाकी सदस्य देशों से बात की गई तो पुतिन की अनुवादक ने उनका भाषण समझाया. जबकि अमेरिकी सैन्य अधिकारियों से पुतिन ने खुद हाथ मिलाया और उनसे बातचीत भी बिना अनुवादक के ही की.

ये पहली बार नहीं है. जब पुतिन ने अमेरिका और नाटो सदस्यों के बीच फर्क को प्रतीकों से जाहिर किया हो. आपको याद होगा 15-16 अगस्त 2025 को जब यूक्रेन युद्ध के सीज़फायर को लेकर अमेरिका के अलास्का में पुतिन और ट्रंप मिले थे. तब भी पुतिन ने कहा था कि  उनकी नजर में अमेरिका ऐसा पार्टनर है. जिसके साथ व्यापार की असीमित संभावनाएं हैं. जबकि नाटो का एजेंडा रूस की सुरक्षा के लिए बड़ा खतरा है. शायद इन्हीं भावनाओं को पुतिन ने य़ुद्धाभ्यास के मंच मिलिट्री यूनिफॉर्म पहनकर  दोहराया है.

भेड़िया घात लगाता और फिर खा जाता है- पुतिन

हमारा ये विश्लेषण रूस के राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन से जुड़ा था. हम इसका अंत भी पुतिन के एक मशहूर कथन से कर रहे हैं. जो कुछ हद तक पुतिन विरोधियों से जुड़ा आता है. 

वर्ष 2006 में एक भाषण के दौरान पुतिन ने कहा था कि एक भेड़िए को पता होता है उसे किस जानवर का शिकार करना है. वो किसी की सुनता नहीं है. वो बस अपने शिकार की टोह लेता है. फिर घात लगाता है और आखिर में उसे खा जाता है.




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