- स्टिंग में खुलासा-कंटेनर में भर रहे मजदूरों को
- मजदूरों से प्रति सवारी 2500-3000 रुपये ले रहे
- 60-60 आदमी को एक कंटेनर में बैठा रहे हैं
कोरोना लॉकडाउन के दौरान मजदूरों के पलायन की तस्वीरें डराने वाली हैं. लेकिन इन तमाम तस्वीरों के पीछे की कहानी और झकझोर देने वाली है. जब ‘आजतक’ ने ये कहानी जानी तो बेहद चौंकाने वाली निकली कि कैसे ट्रकों में मजदूरों को भर कर उनके गृह राज्य में छोड़ा जा रहा है. वहीं फैक्ट्री बंद होने और रोजगार न होने की वजह से मजदूर भी घर जाने के लिए परेशान हैं.
दिल्ली की आज़ादपुर मंडी का हाल भी देखा जा सकता है. दर्जनों मजदूर एक झुग्गी में भरे हुए हैं. सबके पास अपना अपना सामान है और घर जाने के लिए ट्रक का इंतज़ार कर रहे हैं. इन्होंने एक ट्रक वाले को प्रति सवारी 2500 से 3000 रुपये दिए हैं. यह ट्रक भी कैसा है? एक बंद कंटेनर जिसमें सांस लेना भी मुश्किल हो जाए, सोशल डिस्टेंसिंग तो छोड़ ही दीजिए.
तस्वीर का सच खंगालने के लिए ‘आजतक’ के रिपोर्टर ने फैक्ट्री वर्कर बनकर इस ट्रक वाले से संपर्क साधा. उसने आजतक के रिपोर्टर से जो डील की, वो आपको बताते हैं.
रिपोर्टर- पैसा कितना देना होगा
ट्रक चालक- तुम दे देना 2500
रिपोर्टर- 2500 मुजफ्फरपुर तक?
ट्रक चालक- हां, तुम्हें 500 कम कर दिए, तुम्हारा शक्ल देख कर.
ट्रक चालक- कुल 74 आदमी मेरे पास आए हैं
रिपोर्टर- आज?
ट्रक चालक- आज
रिपोर्टर- रास्ते में फसेंगे तो नहीं?
ट्रक चालक- नहीं अपना महुआ (वैशाली) तक गाड़ी भेजा है. नाहर तक भेजा है. ताजपुर(समस्तीपुर) तक गाड़ी भेजा है.
रिपोर्टर- कितने लोगों को बैठा-बैठा कर भेजा?
ट्रक चालक- 60-60 आदमी को.
ट्रक चालक- दो तो खुल गया एक और खुलेगा हाजीपुर के लिए.
ट्रक चालक- सारे लोग जाने वाले हैं यहां सारे टोटल.
लॉकडाउन में लाखों मजदूर अपने घर जाने के लिए परेशान हैं, और इसके लिए वो कुछ भी करने को तैयार हैं. चाहे उन्हें घर जाने के लिए कोई भी कीमत क्यों ना चुकानी पड़े.
आजादपुर मंडी में ही हमें एक और ट्रक वाले के बारे में पता चला. ये ट्रक वाला वैसे तो एक शहर से दूसरे शहर सब्ज़ी और फलों की ढुलाई करता है. लेकिन आजकल मजदूरों की ढुलाई करता है. कैसे ये मजदूरों को दिल्ली से झारखंड तक पहुंचा रहा है. मजदूर ट्रक के कैबिन की छत पर लेट जाते हैं, और ये उन्हें दिल्ली से झारखंड पहुंचा देता है.
रिपोर्टर- पहले कैसे लेकर गए थे?
ट्रक चालक- पहले गए थे ऊपर लेटा कर गए थे.
रिपोर्टर- कहां लेकर गए थे?
ट्रक चालक- बरई झारखंड
इस ट्रक वाले ने आजतक के अंडरकवर रिपोर्टर से भी कहा कि वो उन्हें भी कोलकाता तक छोड़ सकता है.
रिपोर्टर- भाई देखो 7 लोग हैं हमारे. 7 लोग के कितने हुए?
ट्रक चालक- हमने आपसे प्रति आदमी 3500 रुपये बोला था.
ट्रक चालक- सारे आदमी कोलकाता ही जाएंगे ना?
रिपोर्टर- सारे कोलकाता जाएंगे.
ट्रक चालक- अपने बंदे को आप समझा देना, वहां पर आराम से मोबाइल अपना स्विचऑफ करके लेट जाए कोई दिक्कत नहीं है.
रिपोर्टर- मोबाइल क्यूं स्विचऑफ करना है?
ट्रक चालक- सायलेंट कर देंगे. वरना पता लगेगा कि बैरियर लगा है और उनका मोबाइल उधर चिल्लाने लगा, और पुलिस वाला बोल दिया अबे मोबाइल ऊपर कहां से चिल्ला रहा है.
तो इस तरह से ट्रक वाले मजदूरों को खुफिया तरीके से ले जाने के लिए तैयार हैं. चाहे वो दिल्ली से बिहार हो या झारखंड या फिर पश्चिम बंगाल, ट्रक वाले पैसे लेकर कहीं भी पहुंचाने के लिए राज़ी हैं.