बारिश की संभावना जताई जा रही है. (फाइल फोटो)
मौसम वैज्ञानिकों (weather scientists) में मुताबिक मौसम का बार-बार परिवर्तन होना और औसत से अधिक बार तूफान आना जलवायु परिवर्तन की ओर इंगित करता है.
बता दें कि एक माह के भीतर 9 वेस्टन डिस्टर्वेंस बने जो आमतौर पर तीन से चार बनते थे. एक आंकड़े के मुताबिक वर्ष 2019 में 1 और 2 नवम्बर, 19, 5 और 6 नवम्बर को, 8 और 10 नवम्बर को 12 और 16 नवम्बर को, 18 और 24 नवम्बर को, 24 और 25 नवम्बर को, 25 और 28, व 28 व 29 नवम्बर को वेस्टन डिस्टर्वेंस हुआ. 3 वेस्टन डिस्टर्वेंस अफगानिस्तान में बना, लेकिन 06 वेस्टन डिस्टर्वेंस ने भारत के मौसम को प्रभावित किया. वहीं इस वर्ष अप्रैल और मई माह में बारिश, तेज अंधड़, आकाशीय बिजली गिरी साथ ही जमकर ओले भी गिरे.
इन तूफानों ने मचाई तबाही
एक वर्ष में अमूमन 3 से 4 तुफान आते थे, मगर इस बार यह संख्या दो गुनी होकर 7 हो गई. वर्ष 2019 में सात तुफान आए. इसमें फानी, वायू, हिका, कपार्ब, महा, बुलबूल, पवन शामिल हैं. चार तूफानों का सीधा असर भारत और छत्तीसगढ़ पर हुआ. छत्तीसगढ़ के मौसम वैज्ञानिक एचपी चंद्रा ने बताया कि प्रशांत महासागर के पानी का तापमान बढ़ जाना अलनिनों कहलाता है. इसी क्षेत्र का तापमान सामान्य से घट जाना लानिनो कहलाता है. मगर न्यूट्रल कंडिशन के बाद वेस्टन डिस्टर्वेंस आना चिंता का विषय है. तुफान पश्चिम बंगाल की खाड़ी में अधिक बनता है, पर अरब सागर की खाड़ी में बनना चिंता का विषय है. एफमान तूफान का आशिंक असर छत्तीसगढ़ में भी रह सकता है. इसको लेकर अलर्ट जारी किया गया है.ये भी पढ़ें:
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First published: May 17, 2020, 8:04 AM IST