विजय माल्या को लाया जा रहा भारत? अफसर बोले- कोई सूचना नहीं – Extradition papers of vijay mallya yet to be signed uk yet to inform india

  • माल्या की प्रत्यर्पण की रिपोर्ट को जांच एजेंसियों ने किया खारिज
  • भारत लाने के संबंध में दस्तावेज पर हस्ताक्षर की जानकारी नहीं

शराब कारोबारी विजय माल्या के भारत लाने को लेकर अनिश्चिता बनी हुई है. भारतीय जांच एजेंसियों ने उस रिपोर्ट को खारिज कर दिया है कि विजय माल्या को कभी भी मुंबई लाया जा सकता है. सरकार के सीनियर सूत्रों ने इंडिया टुडे को बताया कि ब्रिटेन की तरफ से भारत को इस संबंध में अभी तक कोई सूचना नहीं मिली है.

असल में कहा जा रहा था कि विजय माल्या कभी भी भारत पहुंच सकता है. मुंबई में उसके खिलाफ मुकदमा दर्ज है, इसलिए उसे मुंबई ही लाया जाएगा. लेकिन सरकारी सूत्रों ने इन रिपोर्टों को खारिज कर दिया है और उनका कहना है कि उन्हें अभी इस सिलसिले में ब्रिटिश प्रशासन की तरफ से कोई जानकारी नहीं मिली है.

यह पूछे जाने पर कि विजय माल्या को कब प्रत्यर्पित किया जा सकता है, इस मामले पर करीब से नजर रखने वाले एक सीनियर अफसर ने बताया, “हमें इस बात की जानकारी नहीं है कि ब्रिटेन के गृह सचिव ने दस्तावेजों पर हस्ताक्षर किए हैं या नहीं. जब तक दस्तावेजों पर हस्ताक्षर नहीं हो जाते हैं या हमें मामले की स्थिति के बारे में सूचित नहीं किया जाता है, तब तक यह अनुमान लगाना मुश्किल होगा कि विजय माल्या को कब प्रत्यर्पित किया जा सकता है.”

प्रत्यर्पण अधिनियम के मुताबिक विजय माल्या को भारत भेजने को लेकर दस्तावेजों पर ब्रिटेन के गृह कार्यालय सचिव के दस्तखत की अंतिम तारीख 11 जून 2020 है.

इस बात की भी अटकलें लगाई जा रही है कि विजय माल्य ब्रिटेन में राजनीतिक शरण मांगे जाने को लेकर आवेदन कर सकता है. लेकिन इंडिया टुडे को सूत्रों ने बताया कि न तो केंद्रीय जांच ब्यूरो (सीबीआई) और न ही प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) को ब्रिटेन के गृह कार्यालय से इस संबंध में कोई सूचना मिली है. ब्रिटेन में भारतीय उच्चायोग को भी कोई ठोस जानकारी नहीं मिली है.

विशेषज्ञों का कहना है कि चूंकि प्रत्यर्पण से बचने के लिए विजय माल्या के पास सभी कानूनी विकल्प समाप्त हो चुके हैं. इसलिए उसके पास दो विकल्प बचते हैं पहला राजनीतिक शरण और दूसरा यूरोपीय मानवाधिकार न्यायालय का दरवाजा खटखटाना.

भारत और ब्रिटेन के बीच हुए समझौते के मुताबिक अगर माल्या को ब्रिटेन में राजनीतिक शरण मिल जाती है तो वह वहां जब तक चाहे रह सकता है.

सूत्रों ने बताया कि अगर माल्या ने शरण के लिए आवेदन किया है, तो यह ब्रिटेन हाई कोर्ट के आदेश से बहुत पहले हुआ होगा, जो उसे भारत के प्रत्यर्पण के लिए एक उपयुक्त मामला था. अगर वह अदालत के अंतिम आदेश के बाद शरण मांगता है, तो इसे ब्रिटेन सरकार खारिज कर देगी.

अगर विजय माल्या ने शरण के लिए आवेदन कर दिया है तो उसके प्रत्यपर्ण में और देरी होगी क्योंकि ब्रिटेन का गृह विभाग तब तक उसे भारत लाने को मंजूरी नहीं देगा जब तक शरण मांगने की अर्जी पर सुनवाई पूरी नहीं हो जाती.

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