शराबबंदी का वादा करने वाले छत्तीसगढ़ में लॉकडाउन के बाद तेजी से बढ़ी शराब की डिमांड | raipur – News in Hindi

छत्तीसगढ़ के मुख्यमंत्री भूपेश बघेल.

कोरोना के बाद लगे लॉकडाउन को जब केंद्र सरकार ने 2 महीने बाद हटाया था तभी भी रायपुर अल्कोहल कंजम्पशन के मामले में नंबर वन था.

  • News18Hindi

  • Last Updated:
    August 21, 2020, 10:27 AM IST

रायपुर. 2019 में छत्तीसगढ़ विधानसभा में पेश किए गए आंकड़ों के मुताबिक छत्तीसगढ़ के 35 फीसदी से अधिक लोग शराब पीते हैं, जो इस मामले में देश के दूसरे राज्यों से अव्वल है. उन आंकड़ों में बताया गया कि शराब पीने के मामले में दूसरे नंबर पर त्रिपुरा और तीसरे नंबर पर पंजाब के लोग हैं. प्रति व्यक्ति खपत के आधार पर देखें तो शराब के मामले में छत्तीसगढ़ आबादी में अपने से चार गुना बड़े महाराष्ट्र से भी दोगुनी ज्यादा कमाई कर रहा है. इस बार भी ऐसा ही कुछ है. कोरोना महामारी के दौर में एक बार फिर राज्य में शराब की जबर्दस्त खपत हो रही है और पूरे राज्य में रायपुर शराब के मामले में नंबर वन है. हालांकि, छत्तीसगढ़ की भूपेश सरकार प्रदेश में पूर्ण शराबबंदी लागू करने के का ऐलान किया था, जिसके आसार दूर-दूर तक नजर नहीं आ रहे हैं. ऐसे में एक बार फिर विपक्ष ने मुख्यमंत्री भूपेश बघेल पर हमले तेज कर दिए हैं.

2018 में किया था वादा
साल 2018 में राज्य की 68 सीटें जीतने से पहले ही कांग्रेस ने अपने घोषणापत्र में पू्र्ण शराबबंदी का वादा किया था. जबकि कोरोना के कारण हुए लॉकडाउन के बाद छत्तीसगढ़ सरकार केरल के बाद शराब के ठेके खोलने वाला दूसरा राज्य था. यहां तक तक राज्य में ऑनलाइन डिलिवरी भी शुरू की गई थी. ऐसे में विपक्ष ने छत्तीसगढ़ की भूपेश बघेल सरकार पर यू-टर्न का आरोप लगाया है.

क्या कहती है PRS रिपोर्टदिसंबर 2019 में छपी PRS India की ‘State of State Finances: 2019-20’ रिपोर्ट के मुताबिक छत्तीसगढ़ सरकार का 22 प्रतिशत रेवेन्यू सिर्फ एक्साइज ड्यूटी से ही आता है. कोरोना के बाद लगे लॉकडाउन को जब केंद्र सरकार ने 2 महीने बाद हटाया था तभी भी रायपुर अल्कोहल कंजम्पशन के मामले में नंबर वन था. उस समय राज्य की सरकार ने शराब पर 10 प्रतिशत कोरोना सेस भी लगाया था. हालांकि कोविड-19 के बाद छत्तीसगढ़ के मुख्यमंत्री भूपेश बघेल इस बात को दोहरा चुके हैं कि यह कठिन समय है और इस तरह राज्य में इस तरह से रेवेन्यू नहीं जुटाया गया तो कर्मचारियों की तनख्वाह देना भी मुश्किल हो जाएगा.




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