भोपाल। मध्य प्रदेश की राजधानी भोपाल और वन्यजीव संरक्षण से जुड़ी दुनिया में तेंदुए की खाल बरामदगी के एक मामले ने नया मोड़ ले लिया है। उत्तर प्रदेश के आगरा में कथित वन्यजीव तस्कर भगवान सिंह के पास से 10 तेंदुओं की खाल और प्रतिबंधित शिकार के उपकरण बरामद होने के बाद जांच एजेंसियां उसकी कथित फर्जी पहचान ‘सलीम’ को लेकर जांच कर रही हैं।वन विभाग से जुड़े सूत्रों के मुताबिक, आरोपी द्वारा इस्तेमाल किए गए ‘सलीम’ नाम और उसके कथित संपर्कों की जांच की जा रही है। अधिकारियों का आरोप है कि यह पहचान कथित तौर पर कुछ लोगों की मदद से तैयार की गई थी और इसका इस्तेमाल वन्यजीव अपराध से जुड़े नेटवर्क में किया गया।मामले में मध्य प्रदेश की PCCF-Wildlife डॉ. समिता राजोरा के अनुसार, आरोपी के बयानों और डिजिटल साक्ष्यों की जांच में उसके Wildlife SOS से कथित संबंध सामने आए हैं। इसी आधार पर संगठन के सह-संस्थापक और CEO कार्तिक सत्यनारायण का नाम जांच के दायरे में आने के बाद उन्हें समन जारी किए जाने की बात सामने आई है।हालांकि, Wildlife SOS ने आरोपों को सिरे से खारिज किया है। संगठन का कहना है कि वैध एंटी-पोचिंग इंटेलिजेंस और मुखबिरों के काम को वन्यजीव अपराध के तौर पर पेश करना गंभीर रूप से नुकसानदायक हो सकता है और इससे वन्यजीव अपराध की सूचना देने वाले व्हिसलब्लोअर्स में डर पैदा होगा।अब जांच का मुख्य फोकस इस बात पर है कि भगवान सिंह ने ‘सलीम’ नाम का इस्तेमाल कब और कहां किया, यह पहचान किसने उपलब्ध कराई और आरोपी के Wildlife SOS से वास्तविक संबंध क्या थे। मामले में सामने आने वाले डिजिटल साक्ष्य और पूछताछ के बाद ही आरोपों की वास्तविकता स्पष्ट हो सकेगी।


