Human lives above profits as US pharma companies eye pandemic boom|क्या फार्मा कंपनियों के लिए मुनाफे से ज्यादा जरूरी होगा मानव जीवन?

नई दिल्ली: मौजूदा दवाएं हमें इस महामारी के सबसे बुरे दौर से निकाल सकती हैं, लेकिन हो सकता है कि दवा कंपनियां ये दवाएं उन सब को न दें जिन्हें इनकी जरूरत है, क्योंकि इन दवाइयों की कीमत ज्यादा है.

बड़ी फार्मा कंपनियां ड्रग्स बनाती हैं. इलाज या दवा पर मालिकाना हक के लिए कंपनियां पेटेंट कराती हैं. ये पेटेंट फार्मा कंपनियों को दवाओं की कीमतें नियंत्रित करने की अनुमति देते हैं, जिसका मतलब ये हुआ कि जिसे भी दवा की जरूरत है, हो सकता है कि उसे ये दवा न मिल सके.

इन उदाहरणों पर गौर करें, Sofos-buvir वो दवा है जिससे हेपेटाइटिस सी का इलाज किया जाता है. इसे COVID-19 के संभावित उपचार के रूप में देखा जाता है. इसे बनाने में सिर्फ पांच डॉलर खर्च होते हैं, लेकिन अमेरिका में, इसकी मौजूदा कीमत 18,000 डॉलर से ज्यादा है.

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इसी तरह, Pir-feni के लिए 28 दिनों के इलाज के लिए 31 डॉलर खर्च करने पड़ते हैं. लेकिन अमेरिका में इसकी कीमत करीब 9,600 डॉलर है. 5 डॉलर से 18 हजार डॉलर, 31 डॉलर से सीधा 9,600 डॉलर, क्या आप फर्क देख रहे हैं?

बड़ी फार्मा कंपनियों पर नजर रखने वालों को उनसे ऐसी ही उम्मीद कोरोना वायरस (Coronavirus) वैक्सीन उपलब्ध हो जाने पर भी है. गेराल्ड पॉसनर एक अमेरिकी पत्रकार हैं जिन्होंने बड़ी फार्मा कंपनियों की जांच की है. उनका मानना ​​है कि फार्मा दिग्गज इस महामारी को एक अवसर के रूप में देखते हैं, जो उन्हें इस पीढ़ी में नहीं मिला है.

विकसित देश सबसे बुरी तरह प्रभावित हुए हैं, लेकिन सहयोग के बजाय, वैक्सीन बनाने की होड़ एक प्रतियोगिता बन गई है.

इस महीने की शुरुआत में, यूरोपीय संघ ने एक ऑनलाइन शिखर सम्मेलन आयोजित किया, जिसमें करीब 40 देशों ने हिस्सा लिया. उन्होंने कोरोना वायरस से लड़ने के लिए वैक्सीन और दवाओं को जल्द से जल्द विकसित करने के लिए 8 बिलियन डॉलर से अधिक का वादा किया. जानते हैं इसमें कौन शामिल नहीं था? अमेरिका. अमेरिकी सरकार का मानना ​​है कि अमेरिकी कंपनियों पहले ही वैक्सीन खोज लेंगी.

अमेरिकी फार्मा दिग्गज जो कई प्रमुख पेटेंटों के मालिक हैं, वो किसी भी इलाज के लिए बहुत ज्याद कीमत लेते हैं. 

ये प्रतियोगिता और भी ज्यादा भयानक होती जा रही है, और बड़ी फार्मा कंपनियां कोविड​​-19 के इलाज पर मालिकाना हक चाहती हैं. वायरस को खत्म करना किसी एक वैश्विक खिलाड़ी का विशेषाधिकार नहीं हो सकता.

किसी एक कंपनी या एक देश और कंपनियों के लिए, सिर्फ एक बार मानव जीवन को मुनाफे से ऊपर रखना काफी बड़ा काम है.

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