August 1, 2020

Amar Singh always remains the need of political parties despite being surrounded by controversies – विवादों से घिरे रहने के बावजूद हमेशा राजनीतिक पार्टियों की जरूरत बने रहे अमर सिंह

विवादों से घिरे रहने के बावजूद हमेशा राजनीतिक पार्टियों की जरूरत बने रहे अमर सिंह

समाजवादी पार्टी के पूर्व नेता अमर सिंह का निधन हो गया (फाइल फोटो).

नई दिल्ली:

समाजवादी पार्टी के पूर्व नेता और राज्यसभा सांसद अमर सिंह (Amar Singh) का आज निधन हो गया. वे 64 साल के थे. लंबे समय से बीमार चल रहे अमर सिंह का सिंगापुर में इलाज चल रहा था. इसी साल मार्च महीने में उन्होंने अपनी किडनी से जुड़ी बीमारी की वजह से सिंगापुर के एक बड़े अस्पताल में सर्जरी करवाई थी. अमर सिंह को समाजवादी पार्टी के बड़े नेता के तौर पर पहचाना जाता रहा. अमर सिंह हमेशा खास तौर पर यूपी की राजनीति के केंद्र में बने रहे. वे राजनीतिक विवादों के कारण भी हमेशा चर्चा में रहे.  

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अमर सिंह का व्‍यक्तित्‍व ही ऐसा था कि वे राजनीति में भले ही विवादों से घिरे रहे हों लेकिन उनकी अपरिहार्यता हमेशा बनी रही. अमर सिंह के विरोधी उन्‍हें बेहद महत्‍वाकांक्षी और साजिश रचने वाला मानते थे तो उनके समर्थक उन्‍हें फंड रेजर और क्रा‍इसिस मैनेजमेंट का माहिर बताते थे. कारोबारी अमर सिंह के बारे में कहा जाता है कि उनके संबंध सभी पार्टियों में थे जिसके कारण वे ‘संकटमोचक’ के तौर पर उभरते रहे.

राजपूत परिवार में जन्‍मे अमर सिंह को उनकी खास सहयोगी जयाप्रदा के साथ 2010 में समाजवादी पार्टी से निकाल दिया गया था. सपा से निकाले जाने के बाद अमर सिंह ने लोकसभा चुनाव के दौरान राष्‍ट्रीय लोकदल से हाथ मिला लिया और फतेहपुर सीकरी से चुनाव भी लड़ा लेकिन हार गए. सपा से बाहर रहने के बाद भी न तो पार्टी प्रमुख मुलायम सिंह अमर सिंह को भूल पाए और न अमर सिंह, सपा सुप्रीमो को. सन 2016 में यूपी में विधानसभा चुनाव के पहले वे पार्टी में वापसी करने में कामयाब रहे थे. हालांकि मुलायम के बेटे अखिलेश के अमर सिंह को नापसंद करने से यह संबंध आगे नहीं चल सके. फिलहाल अमर सिंह की बीजेपी से करीबी बताई जा रही थी.  

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अमर सिंह को मुलायम सिंह का काफी विश्‍वास हासिल था. सन 2008 में जब यूपीए सरकार के अमेरिका के साथ प्रस्तावित परमाणु समझौते के कारण भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी ने अपना समर्थन वापस ले लिया था. इससे सरकार अल्पमत में आ गई थी. कहा जाता है कि उस समय अमर सिंह ने ही मुलायम सिंह यादव को यूपीए सरकार को समर्थन देने के लिए राजी किया था. समाजवादी पार्टी में कॉर्पोरेट कल्‍चर लाने वाले भी अमर सिंह ही थे. हालांकि इसके लिए वे विरोधियों के निशाने पर भी रहे. पैसे, बॉलीवुड और देश की ताकतवर हस्तियों तक अपनी पहुंच के लिए मशहूर अमर सिंह सपा की ओर से कई बार राज्‍यसभा सदस्‍य रहे. वे संसद की कई समितियों के सदस्‍य भी रहे.

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अमर सिंह के साथ विवाद हमेशा जुड़े रहे. इसमें यूपीए सरकार के पक्ष में वोट देने के लिए तीन बीजेपी सांसदों को कथित तौर पर रिश्‍वत की पेशकश करने का मामला प्रमुख है. उनके खिलाफ एक ऑडियो टेप भी आया था जिसमें दावा किया गया था कि उसमें अमर सिंह की आवाज है. अमर सिंह एक समय बॉलीवुड के सुपर स्‍टार अमिताभ बच्‍चन के भी खास सहयोगी रहे लेकिन वक्‍त के साथ उनके संबंधों में खटास आती गई.

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