- कोंडागांव जिले के चिचाड़ी गांव का दिव्यांग देवीराम दबंगों के आगे नहीं झुका
- सरपंच देवी राम कोर्राम को 200 मत पड़े हैं और उसने 117 मतों से जीत हासिल की
Dainik Bhaskar
Feb 09, 2020, 03:55 AM IST
केशकाल / विश्रामपुरी . कोंडागांव जिले के चिचाड़ी गांव के दिव्यांग देवीराम कोर्राम ने गांव के दबंग लोगों के विरोध और उनके दबाव में गांव से बहिष्कृत होने के बाद के बाद भी सरपंच चुनाव लड़ा और जीता। चिचोड़ी में करीब 6 महीने पहले गांव के प्रमुख लोगों ने चौपाल में एक बैठक करके सरपंच को बुलाया।
सरपंच के नहीं आने पर उसे गांव से बहिष्कृत कर दिया। इसके साथ ही उसका हुक्का पानी बंद कर दिया गया। गांव में मुनादी करवाकर कड़ी चेतावनी दे दी गई कि सरपंच के घर में कोई जाएगा तो उसे 7051 रुपए का जुर्माना देना होगा। सरपंच के घर में किसी भी ग्रामीण का आना जाना बंद हो गया। लेकिन सरपंच ने हार नहीं मानी और वह दो प्रस्तावक एवं समर्थक के माध्यम से नामांकन किया और फिर से सरपंच पद के लिए चुनाव लड़ा और जीत हासिल की। मामला कोंडागांव जिला के बडेराजपुर जनपद पंचायत क्षेत्र के ग्राम पंचायत चिचाड़ी का है। गांव में 564 मतदाता हैं। जीत हासिल करने के लिए उसे चार प्रत्याशियों को हराना था। चुनाव जीतना कठिन था बावजूद कोराम ने हार नहीं मानी। सरपंच देवी राम कोर्राम को 200 मत पड़े हैं और उसने 117 मतों से जीत हासिल किया।
तीन किमी दूर से लाता था पानी
बहिष्कृत देवीराम को तीन किलोमीटर दूर लिहागांव पंचायत से पानी लाना पड़ता था। क्योंकि गांव के किसी कुएं या हैंडपंप से पानी लेने की मनाही थी। सामान भी वह दूसरे गांव जाकर लेता था। देवीराम बताता है कि किसी कारण से वह शौचालय का पैसा मिलने में देर हो गई। इसी का बहाना बनाकर गांव के कुछ लोगों ने खुद को मुखिया बताते हुए बैठक बुलाई जिसमें वह नहीं जा पाया। उसके बाद उसका हुक्का पानी बंद कर दिया गया। देवीराम ने कहा कि वह पिछले चुनाव में भी ग्राम पंचायत चिचाडी से सरपंच चुना गया था। वह अपने कार्यकाल में किसी प्रकार के विवादों में नहीं रहा। जितना हो सका सेवा की।
शौचालय की राशि देर से दी इसलिए बहिष्कृत
गांव के बुजुर्ग मुखिया लच्छू राम कश्यप ने बताया कि सरपंच देवीराम कोर्राम के द्वारा शौचालय निर्माण की राशि देने में देर किया। जिससे यह शर्त रखा गया था कि तीन दिन के अंदर ग्रामीणों को शौचालय की राशि का भुगतान नहीं करने पर उनको गांव से बहिष्कार किया जाएगा। देवीराम तीन दिन तक पैसा नहीं दे पाया जिससे बहिष्कार कर दिया गया।
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