मध्यप्रदेश में केन-बेतवा लिंक परियोजना के चलते छतरपुर सहित आसपास के क्षेत्रों में हो रहे विस्थापन को लेकर राजनीतिक हलचल तेज हो गई है। मध्यप्रदेश कांग्रेस कमेटी की ओर से महामंत्री निधि चतुर्वेदी ने उप मुख्यमंत्री राजेंद्र शुक्ला को पत्र लिखकर प्रभावित आदिवासी और ग्रामीण परिवारों के अधिकारों की रक्षा तथा समुचित पुनर्वास की मांग उठाई है।पत्र में बताया गया है कि इस परियोजना के कारण हजारों आदिवासी और ग्रामीण परिवार अपनी पैतृक जमीन और घर छोड़ने को मजबूर हो रहे हैं। उनका जीवन ‘जल, जंगल और जमीन’ पर आधारित है, ऐसे में विस्थापन से उनकी आजीविका के साथ-साथ सांस्कृतिक पहचान भी प्रभावित हो रही है।
कांग्रेस ने मांग की है कि भूमि अधिग्रहण की प्रक्रिया पूरी तरह पारदर्शी हो और ग्राम सभाओं की मौजूदगी में निष्पक्ष सर्वे कराया जाए, ताकि हर प्रभावित परिवार को न्यायपूर्ण मुआवजा मिल सके। साथ ही बाजार दर के आधार पर उचित मुआवजा देने और नकद राशि के बजाय भूमि के बदले भूमि उपलब्ध कराने पर जोर दिया गया है।
इसके अलावा पुनर्वास नीति को सम्मानजनक बनाने, विस्थापितों को मूलभूत सुविधाओं से युक्त स्थान पर बसाने और उनके सामाजिक-सांस्कृतिक परिवेश को सुरक्षित रखने की बात कही गई है। कांग्रेस ने यह भी मांग रखी कि प्रभावित परिवारों के कम से कम एक सदस्य को रोजगार की गारंटी दी जाए।पत्र में सरकार से आग्रह किया गया है कि आदिवासियों के पारंपरिक अधिकारों का हनन न हो और पुनर्वास स्थलों का चयन करते समय जल व वन संसाधनों की उपलब्धता को प्राथमिकता दी जाए।
साथ ही परियोजना से जुड़े विस्थापन की निगरानी के लिए एक उच्च स्तरीय समिति गठित करने का सुझाव भी दिया गया है।कांग्रेस का कहना है कि प्रभावित ग्रामीण विकास के विरोधी नहीं हैं, लेकिन विकास की प्रक्रिया में उनके हितों की अनदेखी नहीं होनी चाहिए। प्रशासन से अपेक्षा जताई गई है कि वह आंदोलनरत आदिवासियों के साथ संवेदनशील और मानवीय व्यवहार अपनाए।


