महाकालेश्वर ज्योतिर्लिंग मंदिर में मंगलवार दोपहर आस्था और भक्ति का एक भावुक दृश्य देखने को मिला, जिसने वहां मौजूद हर श्रद्धालु की आंखें नम कर दीं। सीहोर से दर्शन करने आए एक मासूम भक्त की सच्ची लगन के आगे मंदिर प्रबंधन को भी नियमों में नरमी बरतनी पड़ी।जानकारी के अनुसार, सीहोर निवासी शिल्पी गुप्ता अपने भाई भगत के साथ बाबा महाकाल के दर्शन के लिए उज्जैन पहुंची थीं। भगत के मन में भगवान महाकाल को नजदीक से देखने और उन्हें जल अर्पित करने की गहरी इच्छा थी।
लेकिन भारी भीड़ के चलते उसे बैरिकेड्स से ही दर्शन करने पड़े और वह गर्भगृह तक नहीं पहुंच सका।इस दौरान बाबा से दूरी सहन न कर पाने पर भगत की आंखों से आंसू बहने लगे। उसकी निश्छल भक्ति और भावुकता ने वहां मौजूद मंदिर कर्मचारियों और अधिकारियों का दिल छू लिया। मासूम भक्त की तड़प देखकर मंदिर प्रबंधन ने विशेष अनुमति देते हुए उसे सम्मानपूर्वक चांदी द्वार तक पहुंचाया।
शिल्पी गुप्ता ने बताया कि समिति के सहयोग से भगत ने न सिर्फ चांदी द्वार से बाबा महाकाल को जल अर्पित किया, बल्कि शांतिपूर्ण तरीके से दिव्य दर्शन भी किए।यह भावुक घटना अब सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो रही है और लोग इसे सच्ची भक्ति की मिसाल बता रहे हैं। यह वाकया एक बार फिर यह दर्शाता है कि भगवान केवल नियमों से नहीं, बल्कि सच्चे मन और आस्था से प्रसन्न होते हैं।


