मध्यप्रदेश के कटनी में 163 नाबालिग बच्चों से जुड़े कथित मानव तस्करी के मामले ने अब तूल पकड़ लिया है। पिछले चार दिनों से सुर्खियों में बने इस मामले में अब बच्चों के माता-पिता बिहार के अररिया सहित अन्य जिलों से कटनी पहुंच गए हैं। सभी परिजन जीआरपी थाने में अपने बयान दर्ज करा रहे हैं, वहीं पुलिस उनके दस्तावेजों की जांच में जुटी हुई है।परिजनों का कहना है कि उन्होंने अपने बच्चों को अपनी मर्जी से महाराष्ट्र के लातूर स्थित मदरसों में पढ़ाई के लिए भेजा था। उनका आरोप है कि पुलिस ने गलत तरीके से इस पूरे मामले को मानव तस्करी का रूप दे दिया है, जबकि किसी भी बच्चे का अपहरण नहीं हुआ है।
जानकारी के मुताबिक, जब परिजनों को मीडिया के माध्यम से यह पता चला कि उनके बच्चों को ट्रेन से कटनी स्टेशन पर उतार लिया गया है और उन्हें ले जा रहे शिक्षकों पर मानव तस्करी का मामला दर्ज कर लिया गया है, तो वे तुरंत कटनी पहुंच गए। यहां उन्होंने जीआरपी के सामने अपने दस्तावेज पेश किए और बच्चों को भेजने की सहमति की बात दोहराई।
परिजनों ने यह भी बताया कि उन्हें अभी तक यह जानकारी नहीं है कि उनके बच्चों को कहां रखा गया है और वे उनसे मिल भी नहीं पाए हैं, जिससे उनकी चिंता और बढ़ गई है।वहीं, इस पूरे मामले की जांच कर रहे जीआरपी डीएसपी विजय गरौठिया ने बताया कि बच्चों के माता-पिता के बयान दर्ज किए जा रहे हैं और दस्तावेजों का सत्यापन किया जा रहा है।
उन्होंने कहा कि अभी कुछ और परिजनों के आने की उम्मीद है, जिनके बयान के बाद ही आगे की कार्रवाई तय की जाएगी।फिलहाल पुलिस हर पहलू को ध्यान में रखते हुए जांच कर रही है, ताकि यह स्पष्ट हो सके कि मामला वास्तव में मानव तस्करी का है या बच्चों को वैध रूप से पढ़ाई के लिए भेजा जा रहा था।


