DNA ANALYSIS know the reason of social media addiction 5 simple changes to help you cope with this | सोशल मीडिया पर Online रहने की लत की ये है बड़ी वजह, ऐसे कर सकते हैं बचाव

नई दिल्ली: कहा जाता है कि दुनिया में दो ही उद्योग ऐसे हैं जिन्हें चलाने वाले लोग अपने ग्राहकों को यूजर्स कह कर बुलाते हैं. एक है नशीले ड्रग्स का व्यापार और दूसरा है सोशल मीडिया का बिजनेस. इन दोनों ही बिजनेस के केंद्र में ऐसे प्रोडक्ट्स हैं. जो ग्राहकों को किसी न किसी प्रकार के नशे की लत लगा देते हैं. ड्रग्स के नशे के बारे में तो आप पिछले कुछ दिनों में बहुत कुछ सुन और पढ़ चुके हैं. लेकिन आज हम सोशल मीडिया के नशे की बात करना चाहते हैं.

भारत में इस समय फेसबुक के 31 करोड़ से ज्यादा यूजर्स हैं और यूजर्स की संख्या के मामले में भारत दुनिया में पहले नंबर पर है.

भारत में ट्विटर यूजर्स की संख्या 18 करोड़ से ज्यादा है और इस मामले में अमेरिका और जापान के बाद भारत तीसरे नंबर पर है यानी फेसबुक की तरह ट्विटर के लिए भी भारत एक बहुत बड़ा बाजार है.

फेसबुक, ट्विटर और गूगल जैसी कंपनियों पर इन दिनों ये आरोप लग रहे हैं कि ये कंपनियां अपने यूजर्स को गुमराह कर रही है और लोगों को सोशल मीडिया की लत लगाकर ये कंपनियां लोगों के पर्सनल डाटा का भी अपने हितों के लिए इस्तेमाल कर रही हैं. इन आरोपों की जांच के लिए इन दिनों अमेरिका की संसद में इन कंपनियों के खिलाफ एक सुनवाई चल रही है. इस सुनवाई के दौरान कल फेसबुक के सीईओ मार्क जुकरबर्ग Mark Zuckerberg और ट्विटर के सीईओ जैक डोर्सी Jack Dorsey को तलब किया गया था.

इन कंपनियों पर ये आरोप भी है कि ये कंटेंट में अपने हिसाब से बदलाव करती हैं. कौन सा कंटेट ठीक है और कौन सा नहीं, इसका फैसला ये कंपनियां खुद लेती हैं और अपनी मर्जी से किसी कंटेंट को प्रमोट करती है तो किसी को रोक देती हैं.

अमेरिका की संसद में सुनवाई के दौरान फेसबुक और ट्विटर पर ये आरोप भी लगा कि इन टेक कंपनियों के मोबाइल फोन एप्लीकेशंस इस तरह डिजाइन किए गए हैं कि लोग इन एप्स का ज्यादा से ज्यादा इस्तेमाल करें  और उन्हें इनकी लत लग जाए.

इन आरोपों पर मार्क जुकरबर्ग ने अपना पक्ष रखते हुए ये दलील दी है कि फेसबुक का डिजाइन ऐसा नहीं है कि लोगों को इसकी आदत पड़ जाए या लत लग जाए.

हालांकि ट्विटर के सीईओ जैक डोर्सी ने ये माना कि ट्विटर जैसे सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म्स का इस्तेमाल करना लोगों की आदत बन सकता है, यानी लोगों को इनकी लत लग सकती है.

इन कंपनियों के मालिक और संस्थापक भले ही कोई भी दलील दें लेकिन, एक बात तो सच है कि मुफ्त में सेवाएं देने का लालच देकर इन कंपनियों ने लोगों को अपने प्रोडक्ट्स की लत लगा दी है और जैसा कि हम बार बार कहते हैं. जब कोई कंपनी अपने प्रोडक्ट आपको मुफ्त में देती हैं तो आप खुद उस कंपनी के एक प्रोडक्ट बन जाते हैं. एक रिसर्च के मुताबिक

भारत में हर एक व्यक्ति औसतन दिन में ढाई घंटे सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म्स पर बिताता है.

लॉकडाउन के दौरान भारत में हर एक व्यक्ति ने दिन में औसतन चार घंटे फेसबुक और वाट्सऐप पर बिताए इसी साल हुई एक रिसर्च में ये भी बताया गया है कि भारत में लोग एक साल में 1800 घंटे यानी 75 दिन सिर्फ मोबाइल फ़ोन चलाते हुए बिता देते हैं.

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ऐसे में ये सवाल भी उठने लगा है कि क्या अब सोशल मीडिया से ऑफलाइन होने का समय आ गया है और अगर आप सोशल मीडिया से एक ब्रेक लेना चाहते हैं तो आप ऐसा कैसे कर सकते हैं ?

अमेरिका के Harvard Medical School की एक नई रिसर्च के मुताबिक सोशल मीडिया की लत को छोड़ना उतना मुश्किल भी नहीं है जितना आप समझते हैं. बस इसके लिए आपको कुछ उपाय अपनाने होंगे.

सबसे पहले आप अपने मोबाइल फोन पर इन Social Media Platforms के Notification को बंद कर दें. ये बहुत सरल उपाय है क्योंकि अगर आपको नया नोटिफिकेशन मिलेगा ही नहीं तो शायद आप बार बार अपना Social Media Account चेक भी नहीं करेंगे.

आप ऐसी गतिविधियों में ज़्यादा समय बिताएं, जिनमें आपकी रूचि ज्यादा है. ये आपको सोशल मीडिया से दूर रखने में मदद कर सकती हैं.

आप मोबाइल फोन के इस्तेमाल करने का समय निर्धारित कर लीजिए. ऐसा करने पर आप उतनी ही देर मोबाइल फोन चलाएंगे, जितना आपके लिए जरूरी होगा. इससे आप मोबाइल फोन के बेवजह इस्तेमाल से भी बच सकते हैं.

आप रात में सोने से कुछ घंटे पहले अपने मोबाइल फोन को खुद से दूर रख दें और जब तक बहुत जरूरी ना हो अपना मोबाइल फोन चेक न करें.

अगर आप इनमें से कोई भी उपाय नहीं कर पा रहे हैं तो इसके लिए आप ऐसी एप्स इस्तेमाल कर सकते हैं जो आपको ये याद दिलाने का काम करती हैं कि आपने निर्धारित सीमा से ज्यादा समय सोशल मीडिया पर बिता लिया है और अब इससे ब्रेक लेने का समय है. 

जरूरत से ज्यादा सोशल मीडिया इस्तेमाल करने का नुकसान ये होता है कि यहां आप अनजान लोगों से संपर्क तो बना लेते हैं. लेकिन असल जीवन में उनसे संवाद नहीं कर पाते और ये आभासी दुनिया आपको लोगों और रिश्तों के बारे में गलतफहमियों का शिकार बना देती है.

सोशल मीडिया पर हर व्यक्ति खुद को खुशहाल और आनंद से भरा हुआ दिखाता है. लोगों की देखा देखी आप भी अपने बारे में ऐसी ही झूठी कहानियां गढ़ने लगते हैं और धीरे धीरे आपका पूरा व्यक्तित्व ही इस झूठ का शिकार हो जाता है.

इसका सबसे बड़ा नुकसान ये है कि आप सोशल मीडिया का जरूरत से ज्यादा इस्तेमाल करके डिप्रेशन और बेचैनी जैसी समस्याओं का भी शिकार हो सकते हैं.

इसलिए फेसबुक की वॉल से दूसरों के जीवन में ताक झांक करने की बजाय आप अपने जीवन में असली खुशी और आनंद की ऐसी फायर वॉल बनाएं जिसे पार करके सोशल मीडिया का नशा आपको प्रभावित न कर पाए.




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