environmental changes during lockdown: World Environment Day 2020: अब हर साल उठ सकती है एक ही मांग – environmental changes during corona pandemic in india and rest of the world

Edited By Garima Singh | नवभारतटाइम्स.कॉम | Updated:

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कोरोना वायरस के कारण तेजी से फैला कोविड-19 पूरी दुनिया के लिए एक बड़ी चुनौती बन गया। इस वायरस के कारण हर तरफ से सिर्फ शिकायतें और तकलीफों की खबरें ही आ रही थीं। अगर कुछ ऐसा था, जो मुश्किल घड़ी में भी सुकून दे रहा था तो वह है प्रकृति के रूप में तेजी से आया निखार…

लॉकडाउन से मिली राहत

-पिछले करीब 8 महीनों में दुनिया का शायद ही कोई ऐसा देश हो, जिसने लॉकडाउन का दौर ना देखा हो। इससे समाज में अचानक से आर्थिक भूचाल आ गया। काम-धंधे ठप होने से लोगों में मानसिक और भावनात्मक तनाव भी देखने को मिला। लेकिन इसी बीच साफ-सुथरा आसमान और हवा में बढ़ रहा ऑक्सीजन का स्तर सभी को राहत दे रहा था।

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बढ़ी सकारात्मकता

-लॉकडाउन का फैसला सरकार को अचानक लेना पड़ा, इसके लिए ना तो सरकार तैयार थी और ना ही जनता। इसलिए आर्थिक घाटे और नौकरी जाने जैसे संकटों के बीच लगातार सुंदर होती प्रकृति ने हमारे अंदर सकारात्मकता बढ़ाने का काम किया।

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-मेंटल हेल्थ एक्सपर्ट्स तो यहां तक कहते हैं कि ताजी हवा और घटते प्रदूषण का ही कमाल है कि इतने बड़े लॉकडाउन के बाद भी मानसिक बीमारियों के केस उस रफ्तार से नहीं बढ़े, जैसे बढ़ सकते थे। क्योंकि हवा में बढ़ी ऑक्सीजन ने हमारे शरीर के अंदर ऊर्जा बनाए रखी। हमें सकारात्मक रहने में सहायता की।

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बढ़ गई है उम्मीद

-सांस की बीमारी, एलर्जी और प्रदूषण के कारण लगातार बढ़ रहे रोगों के कारण लोगों का भरोसा इस बात से उठने लगा था कि अब ये हवा शायद ही कभी ठीक हो पाएगी…लेकिन कोरोना के कारण ही सही, अचानक हुए इस लॉकडाउन ने उम्मीद जगा दी है कि अगर मानव जाति ठान ले तो प्रकृति को एक बार फिर खुबसूरत बनाया जा सकता है।

-लॉकडाउन के कारण बंद हुए कारखानों और वीकल्स के चलते हवा की क्वालिटी में तेजी से सुधार हुआ। पलूशन का स्तर तेजी से खत्म हुआ। जिन लोगों को कोरोना महामारी के पहले से ही अन्य बीमारियों के चलते मास्क लगाना पड़ रहा था, उन्होंने मास्क उतारकर साफ हवा को महसूस किया।

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टीनेजर्स के लिए नया अनुभव

-साफ सुथरा नीला आसमान और इतनी साफ हवा कि ताजगी आपको खुद-ब-खुद महसूस हो रही है…ऐसा नजारा हमारे देश के महानगरों में पैदा होनेवाले टीनेजर्स ने पहली बार देखा। 12 से 18 साल की उम्र के बच्चों का कहना है कि दिल्ली में हमने कभी इतना साफ और सुंदर आसमान देखा ही नहीं!

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-कई बच्चों और बुजुर्गों का तो यहां तक कहना है कि अगर हवा को साफ करने और प्रदूषण को दूर करने का एक मात्र तरीका लॉकडाउन ही है तो हम चाहते हैं कि बिना किसी महामारी के सरकार हर साल एक महीने का लॉकडाउन करे। ताकि कुछ समय के लिए ही सही हम सभी ताजी और साफ हवा में सांस ले पाएं।

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