दतिया। गणेश चतुर्थी के पावन अवसर पर आज दतिया स्थित प्राचीन गणेश मंदिर में भगवान श्री गणेश का जन्मोत्सव पूरी आस्था और हर्षोल्लास के साथ मनाया जा रहा है। प्रथम पूज्य भगवान गणेश का यह जन्मोत्सव सात दिनों तक चलेगा, जिसमें जगह-जगह पंडाल सजाकर भक्त भगवान गणेश की प्रतिमाएं विराजमान करेंगे और आरती, पूजन तथा भजन-कीर्तन का सिलसिला लगातार जारी रहेगा।मध्यप्रदेश के दतिया में स्थित यह गणेश मंदिर लगभग 250 वर्ष पुराना है और इसे “तंत्र गणेश” के नाम से भी जाना जाता है।
मंदिर में स्थापित भगवान गणेश की प्रतिमा अत्यंत प्राचीन है और अपनी विशेषताओं के कारण खास पहचान रखती है। यह प्रतिमा मूंगा पत्थर (रत्न) से निर्मित है, जो अपने आप में एक दुर्लभ विशेषता मानी जाती है। इतिहासकारों के अनुसार, पूरे भारतवर्ष में इस प्रकार की मूर्ति कहीं और मिलना बेहद दुर्लभ है।मंदिर के निर्माण का इतिहास भी बेहद रोचक है।
इस मंदिर का निर्माण सन 1744 से 1746 के बीच दतिया राजघराने के पांचवें राजा इंद्र सिंह जूदेव द्वारा करवाया गया था। मंदिर परिसर में एक प्राचीन बावड़ी भी है, जो हमेशा पानी से लबालब रहती है, और चारों ओर फैली हरियाली श्रद्धालुओं के लिए आकर्षण का केंद्र बनी रहती है।आज सुबह पांच बजे भगवान गणेश का विधिवत अभिषेक पूजन किया गया, जिसके बाद सुबह आठ बजे भव्य आरती संपन्न हुई। मंदिर में प्रत्येक बुधवार को वैसे भी भक्तों की अच्छी भीड़ रहती है, लेकिन गणेश चतुर्थी के अवसर पर आज सुबह से ही श्रद्धालुओं के आने का सिलसिला अनवरत बना हुआ है। आने वाले सात दिनों तक मंदिर में गणेश भक्तों की खासी भीड़ उमड़ने की संभावना है।
भादो माह में भगवान श्री गणेश के जन्म को गणेश चतुर्थी के रूप में मनाया जाता है। दतिया के इस मंदिर की प्रतिमा को “विजय गणेश” के नाम से भी पुकारा जाता है और इसकी चार भुजाओं में अलग-अलग प्रतीक दर्शाए गए हैं। एक हाथ में कमल पुष्प है, जो देवी लक्ष्मी का प्रतीक माना जाता है, तो दूसरे हाथ में फरसा है, जो शत्रु विनाशक का प्रतीक है। तीसरे हाथ में वेद धारण किए हुए हैं, जो ज्ञान का प्रतीक होने के साथ भगवान गणेश को ज्ञानदाता भी सिद्ध करता है, जबकि चौथे हाथ में माला है, जो भजन मुद्रा के साथ भक्ति, श्रद्धा और आस्था को बढ़ाने वाली मानी जाती है।
मंदिर की पुजारी रितु पुरोहित सहित श्रद्धालुओं का कहना है कि मान्यता के अनुसार जो भक्त लगातार पांच बुधवार इस मंदिर में आकर हाजिरी लगाता है, भगवान श्री गणेश उसकी सभी मनोकामनाएं पूर्ण कर देते हैं। यही वजह है कि दूर-दूर से श्रद्धालु इस अनोखे तंत्र गणेश मंदिर में दर्शन के लिए पहुंचते हैं और भगवान से सुख-समृद्धि का आशीर्वाद मांगते हैं।


