गुना: किसान खाद के लिए परेशान, मकान में मिली 400 बोरी डीएपी, मचा हड़कंप

गुना: “किसान खाद के लिए परेशान, एक मकान में 400 बोरी डीएपी,आधी रात नायब तहसीलदार एवं कार्यपालिक मजिस्ट्रेट की कार्यवाही से मचा हड़कंप”।एक तरफ किसान डीएपी खाद की एक-एक बोरी के लिए तरस रहा हैं… टोकन नहीं मिल रहे… समय पर बुकिंग नहीं हो रही… वितरण केंद्रों पर लंबी कतारें लगी हैं… और दूसरी तरफ बमोरी के बांसखेड़ी पाटन में एक ही मकान के अंदर करीब 400 बोरी उर्वरक मिलने से पूरी खाद वितरण व्यवस्था पर सवाल खड़े हो गए हैं।मामला सोमवार और मंगलवार की दरमियानी रात करीब 12 बजे का है। सूचना मिलने के बाद बमोरी नायब तहसीलदार एवं कार्यपालिक मजिस्ट्रेट* जयप्रकाश गौतम रात के अंधेरे में मौके पर पहुंचे और काफी मशक्कत करने के बाद मकान मालिक चंदन लाल से दरवाजा खुलवाया । मकान की जांच शुरू की। शुरुआती कार्यवाही के दौरान उनके साथ एक एसआई मौजूद बताए गए। बाद में सुरक्षा और तलाशी के लिए बमोरी से डायल-112 पुलिस बल को भी मौके पर बुलाया गया। मकान की तलाशी हुई तो अंदर का नजारा देखकर प्रशासनिक अमला भी हैरान रह गया। वहां करीब 350 बोरी डीएपी और अन्य उर्वरक समेत लगभग 400 बोरी खाद रखी मिली।सवाल यह है कि आखिर इतनी बड़ी मात्रा में डीएपी एक ही मकान में पहुंची कैसे ,,जिस समय किसान सरकारी वितरण केंद्रों पर खाद के लिए परेशान हो रहे हैं, उसी समय किसी एक मकान में सैकड़ों बोरी डीएपी का भंडारण होना कई सवालों को जन्म देता है।नायब तहसीलदार एवं कार्यपालिक मजिस्ट्रेट* द्वारा मौके पर संबंधित मकान मालिक को बुलाया गया संबंधित कृषि विभाग को सूचना दी गई लेकिन सूचना उपरांत भी कृषि विभाग की ओर से किसी भी अधिकारी कर्मचारी के उपस्थित ना होने के कारण उपस्थित पंचों के समक्ष पंचनामा जब्तीनामा और सुपुर्दगी संबंधी कार्यवाही की गई। संबंधित कृषक ने पूछताछ में खाद राजस्थान के बारां जिले से लाना बताया है।लेकिन अब जांच का असली मुद्दा यही है कि खाद कहां से खरीदी गई? किसके नाम से खरीदी गई? कितनी मात्रा में खरीदी गई? उसके बिल और परिवहन संबंधी दस्तावेज मौके पर क्यों नही दिखाये गये ? और सबसे अहम—किस उद्देश्य से इतनी बड़ी मात्रा में खाद एक निजी मकान में रखी गई थी। पहले पत्नी बोली कि यह खाद उनका नहीं होकर किसी दुकानदार का हैजबकि पति ने स्वयं का तथा अन्य रिश्तेदारों का होना बताया ।सबसे बड़ा सवाल—कृषि विभाग कहां था?इस पूरे मामले में सबसे ज्यादा सवाल कृषि विभाग की कार्यप्रणाली पर उठ रहे हैं। बताया जा रहा है कि दो दिन पहले ही कृषि विभाग के अधिकारियों को इस मामले की सूचना दी गई थी। बावजूद इसके रात में जब नायब तहसीलदार एवं कार्यपालिक मजिस्ट्रेट* जयप्रकाश गौतम कार्यवाही के लिए मौके पर पहुंचे तो संबंधित विभाग के अधिकारी वहां मौजूद नहीं बताए गए। जानकारी के मुताबिक कृषि विभाग के अधिकारियों को फोन से सूचना देकर कार्यवाही के लिए कहा गया, लेकिन सुबह कार्यवाही करने की बात कही गई। और कृषि विभाग के अधिकारियों द्वारा मामला टालने की कोशिश भी की गई। चूंकि कृषि विभाग के अधिकारियों के संज्ञान में यह मामला दो दिन पूर्व आ चुका था लेकिन उनके द्वारा कार्यवाही करना उचित नहीं समझा गया।अगर कोई व्यक्ति या किसान खाद की काला बाजारी से संबंधित सूचना कृषि विभाग के अधिकारियों को देना चाहे तो या तो कॉल उठाते नहीं है या फिर कार्यवाही के लिए समय पर पहुंचते नहीं है जिससे जहां जिस स्थान पर रखा उर्वरक का परिवहन हो जाता है या उर्वरक का स्थान परिवर्तन कर दिया जाता है ।जब जिले में खाद को लेकर किसान परेशान हैं… जब डीएपी की उपलब्धता को लेकर लगातार शिकायतें आ रही हैं… जब अवैध भंडारण और कालाबाजारी की आशंका वाले मामलों में प्रशासन कार्यवाही कर रहा है… तो फिर सूचना मिलने के बाद भी कृषि विभाग के अधिकारी मौके पर क्यों नहीं पहुंचे। क्या विभाग को पहले से जानकारी थी? अगर थी तो कार्रवाई क्यों नहीं हुई? और अगर जानकारी नहीं थी तो विभाग की निगरानी व्यवस्था पर सवाल क्यों न उठें ?सकतपुर के बाद बांसखेड़ी ने बढ़ाई चिंतायह मामला इसलिए भी गंभीर माना जा रहा है क्योंकि कुछ दिन पहले ही सकतपुर क्षेत्र में भी डीएपी खाद से जुड़े मामले सामने आए थे। सकतपुर में तीन मकानों में बड़ी मात्रा में डीएपी खाद मिलने के बाद कार्यवाही की गई और स्थानों को सील किया गया। लेकिन यहां भी सवाल उठा कि आखिर कुल कितनी खाद जब्त की गई, कितनी मात्रा में डीएपी थी और कार्यवाही के बाद आगे क्या हुआ।किसान लाइन में, मकान में सैकड़ों बोरी!एक तरफ किसान खाद के लिए टोकन लेने और बुकिंग कराने के लिए परेशान हैं। कई किसान वितरण केंद्रों के चक्कर काट रहे हैं। दूसरी तरफ एक निजी मकान में सैकड़ों बोरी डीएपी मिल रही है।यही तस्वीर अब व्यवस्था से सवाल पूछ रही है—क्या खाद की उपलब्धता वास्तव में कम है, या वितरण व्यवस्था में कहीं बड़ा गैप है?क्या सरकारी सिस्टम को खाद की जानकारी नहीं मिल रही, या निगरानी व्यवस्था कमजोर है?और अगर एक मकान में करीब 400 बोरी खाद पहुंच सकती है, तो क्या ऐसे और स्थानों की भी जांच होगी? *आधी रात की कार्यवाही ने खोले कई सवाल।* बांसखेड़ी पाटन में रात 12 बजे हुई कार्यवाही ने फिलहाल खाद व्यवस्था को लेकर नई बहस छेड़ दी है। तहसीलदार द्वारा मौके पर पहुंचकर की गई कार्यवाही में करीब 400 बोरी उर्वरक मिलने के बाद अब आगे की जांच महत्वपूर्ण होगी। खाद कहां से आई, किस माध्यम से आई, दस्तावेज क्या हैं, भंडारण नियमों का पालन हुआ या नहीं और खाद का वास्तविक उद्देश्य क्या था—इन सभी सवालों की जांच जरूरी है।फिलहाल प्रशासन ने खाद को जब्त कर पंचनामा और सुपुर्दगी संबंधी कार्यवाही की है। अब निगाह इस बात पर है कि कृषि विभाग इस मामले में आगे क्या कार्यवाही करता है और सैकड़ों बोरी खाद के स्रोत से लेकर उसके भंडारण तक की पूरी प्रक्रिया जांच में क्या सामने आती है।एक और अहम सवाल कि नायब तहसीलदार एवं कार्यपालिक मजिस्ट्रेट को रात्रि में की जाने वाली कार्रवाइयों में एक चार का गार्ड उपलब्ध क्यों नहीं करवाया जाता।

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