धमतरी निवासी 92 वर्षीय फुलवा बाई.
धमतरी निवासी इस बुज़ुर्ग की हालत को देखकर किसी को उम्मीद नहीं थी कि वो जानलेवा महामारी से जंग जीत सकेंगी, लेकिन फुलवा बाई का ठीक होना मेडिकल साइन्स के लिए भी एक दुर्लभ केस बन गया है.
देश में संक्रमण की दूसरी लहर को पहली लहर के मुकाबले बेहद खतरनाक बताया जा रहा है. वहीं, छत्तीसगढ़ के धमतरी ज़िले की बात करें तो यहां करीब 8 लाख की आबादी है और रोज़ाना चार सौ से ज्यादा मरीज़ मिलने का ट्रेंड जारी है. दूसरी लहर में कई ऐसे लोगो ने अपनी जान गंवा दी है, जिनकी उम्र 40 साल से कम या उसके आसपास थी.
फुलवा बाई का दिलचस्प केस
बहुत से कम उम्र लोग अभी भी ऑक्सीजन या वेंटिलेटर पर हैं. बावजूद इसके कि विज्ञान का दावा रहा है कि कोरोना से युवाओं को वृद्धों के मुकाबले कम खतरा है. लेकिन सियादेही गांव की 92 वर्षीय फुलवा बाई ने मेडिकल साइन्स के सामने एक रोचक केस पेश किया है.
फुलवा बाई के केस को डॉक्टरों ने रेयर माना.
शादी समारोह में जाने के बाद फुलवा बाई कोरोना संक्रमित हो गई थीं. गांव के 19 लोग भी इसकी चपेट में आ गए थे. गांव को कंटेनमेंट जोन बना दिया गया था. इलाज के दौरान गांव के एक 50 साल के आदमी की मौत भी हो गई. फुलवा बाई को भी नजदीकी सरकारी अस्पताल में भर्ती किया गया, जहां 10 दिन रहने के बाद वो पूरी तरह से स्वस्थ हो गईं और अब अपने घर में हैं.
हैरानी की बात इसलिए…
इस उम्र में फुलवा बाई देखने और सुनने की समस्या का सामना कर रही हैं, लेकिन किसी तरह उन्होंने बताया कि अब वो पहले से काफी ठीक हैं, हालांकि कमजोरी ज़रूर बनी हुई है. फुलवा बाई के नाती सुरेश कुमार ने बताया कि उनकी दादी की उम्र को देखते हुए सब डर गए थे कि अब वो ठीक हो सकेंगी कि नहीं.
गांव के दूसरे लोग भी ये मान कर चल रहे थे कि अब फुलवा बाई शायद कभी अस्पताल से जीवित घर नहीं आ पाएंगी. लेकिन जब फुलवा बाई स्वस्थ होकर घर आईं तो सबकी हैरानी का ठिकाना न रहा. यहां तक कि डॉक्टर भी कम हैरान नहीं हुए.
डॉक्टरों ने माना ‘रेयर केस’
धमतरी के डॉक्टर भी फुलवा बाई की रिकवरी के रेयर केस मान रहे हैं. डाक्टरों का मानना है कि सरकारी अस्पताल में स्टाफ ने फुलवा बाई की सेवा औ्र इलाज में जी जान लगा कर काम किया. लेकिन फुलवा बाई इस महामारी से जीत सकीं तो सबसे बड़ी वजह उनकी अपनी विल पावर ही रही. धमतरी जिले के मुख्य चिकित्सा स्वास्थ्य अधिकारी डॉ. डीके तुर्रे ने कहा कि फुलवा बाई जैसा आत्मविश्वास युवाओ में भी दुर्लभ है.

