दुनियाभर में दुर्लभ खनिजों (रेअर अर्थ एलिमेंट) को लेकर बढ़ती प्रतिस्पर्धा के बीच भारत को एक बड़ा झटका लगा है। चीन पहले से ही इन खनिजों पर अपना मजबूत दबदबा बनाए हुए है, वहीं भारत भी इस दौड़ में पीछे नहीं रहना चाहता। इसी कड़ी में भारत अफ्रीकी देश Zambia के साथ कोबाल्ट और कॉपर खनन को लेकर समझौता करने की दिशा में काम कर रहा था, लेकिन यह डील फिलहाल अटक गई है।
रिपोर्ट के अनुसार, जांबिया की ओर से खनन अधिकारों को लेकर स्पष्ट आश्वासन नहीं मिलने के कारण भारत के साथ बातचीत ठप हो गई है। पिछले साल भारत को जांबिया में लगभग 9000 वर्ग किलोमीटर क्षेत्र में कोबाल्ट और कॉपर की खोज के लिए अनुमति मिली थी।
कोबाल्ट और कॉपर दोनों ही आधुनिक तकनीक और ऊर्जा क्षेत्र के लिए बेहद महत्वपूर्ण खनिज हैं। इलेक्ट्रिक वाहनों (EV), बैट्री निर्माण, इलेक्ट्रॉनिक्स और पावर इंफ्रास्ट्रक्चर में इनका व्यापक उपयोग होता है। खासतौर पर कोबाल्ट बैट्री निर्माण के लिए अहम माना जाता है, जबकि बढ़ती वैश्विक ऊर्जा मांग के चलते कॉपर की जरूरत लगातार बढ़ रही है।
ऐसे में इस डील का लटकना भारत की खनिज रणनीति के लिए एक चुनौती माना जा रहा है। हालांकि, भारत भविष्य में वैकल्पिक स्रोतों और अन्य देशों के साथ साझेदारी के जरिए अपनी जरूरतों को पूरा करने की दिशा में प्रयास जारी रख सकता है।


