छतरपुर/पन्ना में केन-बेतवा लिंक परियोजना के विरोध में आदिवासी और किसान समुदाय का आंदोलन उग्र होता जा रहा है। विस्थापन से नाराज हजारों लोगों ने आज कई मोर्चों पर एक साथ प्रदर्शन कर प्रशासन की चिंता बढ़ा दी।सबसे प्रमुख रूप से प्रभावित ग्रामीण बड़ी संख्या में केन नदी में उतरकर ‘जल सत्याग्रह’ करते नजर आए। घंटों पानी में खड़े रहकर उन्होंने अपने विस्थापन के खिलाफ आवाज बुलंद की। वहीं ‘मिट्टी सत्याग्रह’ दूसरे दिन भी जारी रहा, जहां लोगों ने अपनी जमीन की मिट्टी हाथ में लेकर उसे न छोड़ने का संकल्प दोहराया।
पिछले 10 दिनों से जारी ‘चिता आंदोलन’ ने भी गंभीर रूप ले लिया है। ग्रामीण प्रतीकात्मक चिताओं के पास डटे हुए हैं, जिससे उनके भीतर के आक्रोश और भय का अंदाजा लगाया जा सकता है। इसके साथ ही कई गांवों में ‘चूल्हा बंद’ कर सामूहिक भूख-पड़ताल की जा रही है, जिसमें महिलाएं, बुजुर्ग और बच्चे भी शामिल हैं।
आंदोलनकारियों ने प्रशासन पर कई गंभीर आरोप लगाए हैं। उनका कहना है कि परियोजना के लिए हुई ग्राम सभाएं फर्जी हैं और बिना पूर्ण मुआवजा व पुनर्वास के लोगों को बेदखल किया जा रहा है। साथ ही बिचौलियों द्वारा मुआवजे में अवैध वसूली के आरोप भी सामने आए हैं।
आंदोलन का नेतृत्व कर रहे सामाजिक कार्यकर्ता अमित भटनागर ने प्रशासन पर दबाव की राजनीति करने का आरोप लगाया है। उन्होंने मांग की है कि दोबारा पारदर्शी सर्वे कराया जाए, कानूनी प्रक्रिया के तहत जनसुनवाई हो और मुआवजा सीधे प्रभावितों को मिले।
प्रशासन के साथ हुई वार्ता विफल रहने के बाद आंदोलनकारियों ने कल ‘सांकेतिक फांसी’ देने की चेतावनी दी है। उनका कहना है कि यदि उनकी मांगें नहीं मानी गईं, तो वे अपने आंदोलन को और तेज करेंगे।फिलहाल, हजारों आदिवासी, किसान और महिलाएं प्रदर्शन स्थलों पर डटे हुए हैं। गांवों में चूल्हे ठंडे पड़े हैं और माहौल पूरी तरह तनावपूर्ण बना हुआ है।


