भारत को यदि वास्तव में विश्व गुरु बनना है, तो उसका आधार भारतीय चिंतन और भारतीय मूल्य ही हो सकते हैं। पश्चिमी विचारधाराओं का अनुकरण कर हम नेतृत्व नहीं कर सकते। भारत को अपने “स्व” को पहचानकर आगे बढ़ना होगा—यही चिंतन पंडित दीनदयाल उपाध्याय ने एकात्म मानव दर्शन के रूप में प्रस्तुत किया।पंडित दीनदयाल उपाध्याय का मानना था कि मनुष्य केवल आर्थिक प्राणी नहीं है, बल्कि शरीर, मन, बुद्धि और आत्मा का समन्वित रूप है। उन्होंने “अंत्योदय से राष्ट्रोदय” का मंत्र दिया—अर्थात समाज के अंतिम पंक्ति में खड़े व्यक्ति के उत्थान के बिना राष्ट्र सशक्त नहीं हो सकता।
प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के नेतृत्व में केंद्र सरकार तथा भाजपा-शासित राज्यों की सरकारें इस दर्शन को व्यवहार में उतारती दिखाई देती हैं। “सबका साथ, सबका विकास, सबका विश्वास और सबका प्रयास” का मूल भाव एकात्म मानव दर्शन से ही प्रेरित है।
गरीब और वंचित वर्गों के सशक्तिकरण हेतु जन-धन योजना, उज्ज्वला योजना और आयुष्मान भारत योजना जैसे कार्यक्रम अंत्योदय की अवधारणा को साकार करते हैं। जन-धन योजना से करोड़ों नागरिक बैंकिंग व्यवस्था से जुड़े, उज्ज्वला योजना ने महिलाओं को धुएँ से मुक्ति और सम्मानजनक जीवन दिया, वहीं आयुष्मान भारत योजना ने गरीब परिवारों को स्वास्थ्य सुरक्षा का भरोसा दिया।एकात्म मानव दर्शन स्वदेशी और आत्मनिर्भरता पर विशेष बल देता है। इसी सोच से प्रेरित होकर प्रधानमंत्री मोदी ने आत्मनिर्भर भारत अभियान की शुरुआत की। “वोकल फॉर लोकल” और “लोकल को ग्लोबल” जैसे आह्वान न केवल अर्थव्यवस्था को मजबूत कर रहे हैं, बल्कि राष्ट्रीय स्वाभिमान को भी सुदृढ़ कर रहे हैं।
पर्यावरण संरक्षण और संतुलित विकास भी इस दर्शन के प्रमुख तत्व हैं। स्वच्छ भारत अभियान, नमामि गंगे परियोजना और नवीकरणीय ऊर्जा पर सरकार का जोर मानव और प्रकृति के सहअस्तित्व की भावना को दर्शाता है।सांस्कृतिक राष्ट्रवाद के क्षेत्र में काशी विश्वनाथ कॉरिडोर, महाकाल लोक, केदारनाथ पुनर्निर्माण, सोमनाथ और राम मंदिर जैसे कार्य भारतीय सांस्कृतिक चेतना के पुनर्जागरण के प्रतीक हैं। राष्ट्रीय शिक्षा नीति 2020 में भारतीय ज्ञान परंपरा और समग्र विकास पर दिया गया बल भी एकात्म मानव दर्शन से प्रेरित है।पंडित दीनदयाल उपाध्याय राजनीति को नैतिक कर्म मानते थे। “न्यूनतम सरकार, अधिकतम शासन” की अवधारणा इसी विचार का आधुनिक रूप है। डिजिटल इंडिया, डीबीटी और ई-गवर्नेंस ने शासन को पारदर्शी और जनोन्मुखी बनाया है।
आज पंडित दीनदयाल उपाध्याय भले हमारे बीच न हों, लेकिन उनके विचार और सिद्धांत प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के नेतृत्व में साकार होते दिखाई दे रहे हैं। एकात्म मानव दर्शन भारत को उसकी जड़ों से जोड़ते हुए समरस, आत्मनिर्भर और सशक्त राष्ट्र बनाने की दिशा दिखाता है।