नई दिल्ली: कोरोना महामारी (Corona Pandemics) के इस दौर में चीन ने अपनी विस्तारवादी नीतियों को तेजी से बढ़ाया है. महामारी के इस दौर में चीन अपने कई प्रोजेक्ट्स में तेजी ला चुका है. इसी में से एक है हेल्थ सिल्क रोड (Health Silk Road). चीन इसके दम पर दुनिया के बड़े हिस्से पर अपना आधिपत्य स्थापित करना चाहता है. भारत समेत वैश्विक शक्तियों के सामने न सिर्फ चीन के हेल्थ सिल्क रोड प्रोजेक्ट (Health Silk Road Project) को नाकाम करने की चुनौती है, बल्कि चीनी सरकार की तरफ से होने वाले मानवाधिकार हनन के मामलों को भी रोकने की जिम्मेदारी है.
तकनीकी के दम पर दुनिया को कब्जाने की चीनी नीति!
चीनी कम्युनिस्ट पार्टी (Chinese Communist Party) तकनीकी के दम पर दुनिया को फतह करने का मंसूबा बनाए हुए है.चीन अपनी 5जी तकनीकी (5G Technology) में भारी निवेश कर रहा है. इसमें वो मानवीय मदद और स्वास्थ्य सेवाओं को हाईटेक बनाने के नाम पर 5जी तकनीकी आधारित मशीनें बना रहा है. इसके जरिए तकनीकी का उपयोग कर वो पूरी दुनिया में हेल्थ सिल्क रोड बनाना चाहता है. इसका फायदा चीन को ये होगा कि उस देश की स्वास्थ्य सेवा पूरी तरह से चीन के हवाले हो जाएगी.
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कोरोना महामारी ने दिया चीन को मौका
चीन ने कोरोना महामारी की आड़ में पूरी दुनिया की स्वास्थ्य सेवाओं में अपनी पैठ बना ली है. लेकिन उसकी कोशिश बीआरआई रीजन को पूरी तरह से चीन के चंगुल में लाने की है. नेशनल पीपल्स कांग्रेस के तीसरे सत्र मैं बाकायदा इसपर बहस भी हो चुकी है. चाइनीज पीपल्स पॉलिटिकल कंसल्टेटिव कॉन्फ्रेंस (Chinese People’s Political Consultative Conference) मई 2020 में हुई थी. इस कॉन्फ्रेंस में चीनी मेडिकल तकनीकी, आर्टिफिशियल इंटेलीजेंस, मेडिकल इक्विपमेंट, डाटा सेंटर्स का इस्तेमाल करना है, ताकि चीन उस देश के हेल्थ सेक्टर को मुट्ठी में कर सके.
महामारी से निपटने के तरीकों का जोरदार प्रचार
नेशनल पीपल्स कांग्रेस में प्रीमियर ली केकियांग ने चीनी स्वास्थ्य सेवाओं को 5जी तकनीकी से लैस करने पर जोर दिया. इसके लिए चीन सरकार 1.4 ट्रिलियन डॉलर का बारी भरकम निवेश कर रही है. कोरोना महामारी के दौरान चीनी सरकार का पूरा जोर महामारी से निपटने में चीन सरकार की सफलता को दिखाने पर रहा. इसके लिए पूरी प्रोपेगेंडा मशीनरी (Propaganda Machinery) काम पर लगी हुई थी.
हेल्थ सिल्क रोड पर तीन साल से चल रहा काम
चीन सरकार हेल्थ सिल्क रोड पर साल 2017 से ही काम कर रही है और उसी साल डब्ल्यूएचओ (WHO) के साथ एमओयू (MoU) भी साइन किया था. उस दौरान बीजिंग (Beijing) में बेल्ट एंड रोड फोरम (Belt And Road Forum) पर हेल्थ को-ऑपरेशन को लेकर चर्चा भी हुई थी.


