Raipur News: फिर वही नक्सली आतंक, वही धमाके, वही शहादत… और नेताओं के बयान

नारायणपुर में आईईडी धमाके में सुरक्षाबल के जवानों की मौत के बाद फिर वही घिसे-पिटे बयानों से नक्सल आतंक के खात्मे की मंशा पर सवाल.

Naxalite Terror in Chhattisgarh: छ्त्तीसगढ़ में चाहे दिवंगत अजीत जोगी की सरकार रही हो या भाजपा के रमन सिंह की या फिर अब भूपेश बघेल की मौजूदा सरकार, नक्सली लगातार मजबूत होते गए हैं. अभी नक्सली वारदातें बढ़ गई हैं. यह हम नहीं कहते, बल्कि संसद में दिए गए आंकड़े कहते हैं.

रायपुर. फिर वही नक्सली आतंक, फिर वही धमाके, मौत का तांडव. फिर वही शहादत…, छत्तीसगढ़ में तीन दशक से भी ज्यादा समय से बेखौफ चल रहे मौत के हर ‘खेला’के बाद मुख्यमंत्री की कुर्सी पर रहने वाले सियासी सूरमाओं के बयान आते हैं. छत्तीसगढ़ में सरकार चाहे भाजपा की रही हो या कांग्रेस की, मुख्यमंत्री चाहे भाजपा के रमन सिंह रहे हों, या कांग्रेस के मौजूदा सीएम भूपेश बघेल, नक्सल समस्या को मंच से खत्म करने के लिए करीब-करीब एक जैसा जुमला बोलते हैं. 2018 तक रमन सिंह कहते थे कि ‘इस बार नक्सलियों के खिलाफ आखिरी लड़ाई छत्तीसगढ़ में लड़ी जाएगी,’. अब भूपेश बघेल मंच से बोलते हैं कि ‘हम नक्सलियों को उनके घर में घुस कर मारेंगे.’

हर बड़ी वारदात के बाद केन्द्र और राज्य सरकार मिलकर नक्सलियों के खात्मे के लिए साझा रणनीति का ब्लूप्रिंट तैयार करती है, समन्वय समितियां बनाई जाती हैं, सुरक्षा बलों को मैदान में कूदने को कहा जाता है, लेकिन नतीजा एक और नक्सली वारदात की शक्ल में सामने आता है. इसका ताजा उदाहरण 23 मार्च मंगलवार को छत्तीसगढ़ के नारायणपुर में हुई इस साल की वो सबसे बड़ी वारदात है, जहां नक्सलियों ने जवानों से भरी बस को आईडी ब्लास्ट से उड़ा दिया. इस बस में 24 जवान सवार थे, जिनमें से 5 शहीद हो गए और 14 से ज्यादा गंभीर रूप से घायल हो गए. नारायणपुर की ताजा वारदात के बाद सूबे के गृहमंत्री ताम्रध्वज साहू का वही पुराना घिसा-पिटा बयान सामने आया, जिसमें वह कहते हैं कि नक्सली बौखला गए है. अहिंसा चाहते हैं तो हिंसा क्यों कर रहे. बता दें कि कुछ दिन पहले नक्सलियों ने मीडिया में खबरों के माध्यम से सरकार से सशर्त बातचीत की मांग रखी थी. उसके दो-तीन के भीतर ही यह घटना हुई है.

डेढ़ दशक में 24 बड़ी वारदातें

2005 में छत्तीसगढ़ की तत्कालीन सरकार ने नक्सली आतंक मिटाने और उन्हें मुख्यधारा में जोड़ने के लिए बहुचर्चित सलवा जुडुम नामक अभियान चलाया था, जिसके बाद राज्य में नक्सली आतंक तेजी से फैला. पिछले डेढ़ दशक में नक्सलियों ने दिल दहला देने वाली 24 से ज्यादा बड़ी वारदातें की, जिसमें सुरक्षाबलों के सैकड़ों अफसर और जवान मारे गए. बड़े पैमाने पर नृशंस हत्याएं की गई. आइए ऐसी ही कुछ हौलनाक घटनाओं पर नजर डालते हैं…

  • 28 फरवरी 2006: नक्सलियों ने छत्तीसगढ़ के एर्राबोर गांव में बारूदी सुरंग धमाका किया, जिसमें 25 जवानों की जान गई थी.
  • 16 मई 2006: दंतेवाड़ा के राहत शिविर पर हमला, कई ग्रामीणों का अपहरण, 29 लोगों को मौत के घाट उतार दिया.
  • 15 मार्च 2007: बस्तर क्षेत्र के पुलिस बेस कैंप पर 350 नक्सलियों का हमला. सीएएफ के 15 जवान शहीद.
  • 6 अप्रैल 2010 : दंतेवाड़ा के ताड़मेटलला में एक के बाद एक कई ब्लास्ट, अर्धसैनिक बल के 75 जवानों सहित 76 मौतें.
  • 8 मई 2013 : नक्सलियों ने पुलिस की गाड़ी उड़ाई, भारतीय अर्धसैनिक बल के 8 जवान शहीद.
  • 25 मई 2013 : दरभा की झीरम घाटी में नक्सलियों का बहुत बड़ा हमला, नक्सलियों ने इस हमले में छत्तीसगढ़ कांग्रेस का पूरा नेतृत्व ही खत्म कर दिया था. प्रदेश कांग्रेस के 25 नेताओं की मौत हुई थी, जिसमें विद्याचरण शुक्ल, महेन्द्र कर्मा, नंद कुमार पटेल जैसे बड़े नेता शामिल थे.
  • 28 फरवरी 2014; झीरम घाटी में घात लगाकर नक्सलियों का हमला, सीआरपीएफ के 11 जवान और 4 पुलिसकर्मियों को मौत के घाट उतारा.
  • 1 मार्च 2017: नक्सली हमले में 11 कमांडो शहीद.
  • 22 मार्च 2020- सुकमा जिले के कोराजडोंगरी के चिंता गुफा के पास नक्सली हमले में 17 जवान शहीद.

सरकार बदली, हिंसा कायम

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बस आते रहे नेताओं के बयान

नारायणपुर की वारदात के बाद छत्तीसगढ़ के सीएम भूपेश बघेल का बयान सामने आया. उन्होंने इस हमले में शहीदों को श्रद्धांजलि देते हुए शोक संतप्त परिवारों के प्रति संवेदना व्यक्त की. उन्होंने कहा कि सुरक्षा बलों की कार्रवाई से नक्सलियों के पैर उखड़ने लगे हैं, यह घटना नक्सलियों की हताशा का परिणाम है. सुरक्षा बलों की कार्रवाई और तेज होगी. जनवरी के महीने में बघेल ने रायपुर और बिलासपुर में कहा था कि हम नक्सलियों को उनके घर में घुसकर मारेंगे. सवाल है कि क्या इसी को नक्सलियों के पैर उखड़ना या घर में घुसकर मारना कहते हैं? बघेल के ऐसे बयान क्या पूर्व मुख्यमंत्री रमन सिंह जैसे नहीं हैं, जिनकी आलोचना करते हुए बघेल खुद ऐसा ही कहते थे? छत्तीसगढ़ में 25 जवानों की नक्सली हमले में शहादत के बाद 25 अप्रैल 2017 के बघेल के एक ट्वीट पर गौर करें, जिसमें वो कहते हैं कि हर नक्सली हमले के बाद मुख्ममंत्री रमन सिंह का बयान एक ही तरह का होता है, बदलता कुछ नहीं. यह शर्मनाक है.

बस आते रहे नेताओं के बयान

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बीजापुर से घुसे नक्सली फैले 14 जिलों में

1980 में बीजापुर के रास्ते से घुसा ‘लाल आतंक’ अब राज्य के 14 जिलों में पैर पसार चुका है. दंतेवाड़ा, बस्तर, नारायणपुर, बीजापुर में नक्सली सबसे ज्यादा सक्रिय हैं. इन जिलों के अलावा राजनांदगांव, सरगुजा, कोरिया, धमतरी, गरियाबंद, बालोद, सुकमा, कोंडागांव और बलरामपुर शामिल है. नक्सल प्रभावित जिलों की संख्या को लेकर छ्त्तीसगढ़ और केन्द्र के बीच मतभेद हैं. केन्द्र की नजर में छत्तीसगढ़ में 14 जिले से नक्सल प्रभावित हैं, जबकि राज्य सरकार यह संख्या 18 बताती है.

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कहां है सरकार का ब्लूप्रिंट?

बता दें कि छत्तीसगढ़ में नक्सलियों के खात्मे के लिए कई बार रणनीतियां बनीं और ठंडे बस्ते में चली गईं. नवंबर 2020 में भी केन्द्र की भाजपा सरकार ने सूबे की सरकार के साथ मिल कर नक्सलियों के खात्मे का ब्लूप्रिंट तैयार करते हुए आर-पार की लड़ाई के लिए साझा रणनीति बनाई थी और यह अनुमान लगाया जा रहा था कि अब छत्तीसगढ़ में नक्सलियों के बुरे दिन शुरू हो वाले हैं. लेकिन अभी मुख्यमंत्री असम चुनावों में व्यस्त हैं और केन्द्रीय गृहमंत्री अमित शाह असम, बंगाल समेत 5 राज्यों में, देखना है कि इस ब्लूप्रिंट पर कब अमल होता है, कब जवानों की जान जानी रुकती है और कब नक्सली आतंक नेस्तनाबूद होता है? (डिस्क्लेमरः ये लेखक के निजी विचार हैं.)

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