नई दिल्ली: दुनिया ने कोरोना वैक्सीन (Corona vaccine) तैयार करने की रेस में Russia ने खुद को विजेता घोषित कर दिया है. Russia के राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन ने ऐलान कर दिया है कि उनके देश ने कोरोना वायरस की वैक्सीन बना ली है. इसके साथ ही ऐसा करने वाला Russia दुनिया का पहला देश बन गया है. इससे पहले Russia ने कहा था कि वो इस वैक्सीन को 12 अगस्त को रजिस्टर करेगा. लेकिन उसने एक दिन पहले ही ऐसा कर दिया.
पुतिन की बेटी को भी कोरोना वैक्सीन की डोज दी गई
राष्ट्रपति पुतिन ने इस वैक्सीन को पूरी तरह सुरक्षित और कारगर बताया है. इसकी एक डोज पुतिन की बेटी को भी दी गई है. इस वैक्सीन को Russia के Gamaleya Research Institute (गामालेया रिसर्च इंस्टीट्यूट) और रक्षा मंत्रालय ने मिलकर तैयार किया है. जिसका क्लीनिकल ट्रायल 18 जून को शुरु हुआ था. इसमें 38 लोगों ने हिस्सा लिया था और इन सभी लोगों ने वायरस के ख़िलाफ़ इम्युनिटी हासिल कर ली थी.
ऐसे वक्त में जब दुनियाभर में कोरोना संक्रमण के दो करोड़ से ज़्यादा मामले सामने आ चुके हैं. तब कोरोना की पहली वैक्सीन तैयार हो जाने का ऐलान बड़े मायने रखता है. Russia के स्वास्थ्य मंत्रालय के मुताबिक सितंबर में इस वैक्सीन का उत्पादन शुरु होगा और अक्टूबर में Mass Vaccination की शुरुआत होगी. सबसे पहले Health Workers और बुजुर्गों को ये वैक्सीन दी जाएगी.
शरीर से हमेशा के लिए खत्म हो जाएगा कोरोना संक्रमण
इस वैक्सीन को बनाने वाले गामालेया रिसर्च इंस्टीट्यूट का दावा है कि इस वैक्सीन से शरीर में ऐसे स्थायी Anto Bodoes तैयार होंगे. जिससे कोरोना वायरस के संक्रमण का ख़तरा हमेशा के लिए ख़त्म हो जाएगा. रिसर्च इंस्टीट्यूट के मुताबिक इस वैक्सीन को लगाने के बाद इम्यून सिस्टम तेजी से सक्रिय हो जाता है. जिससे लोगों को बुखार आ सकता है. लेकिन इस साइड इफेक्ट को पैरासिटामॉल जैसी साधारण सी दवा से दूर किया जा सकता है.
जानकारी के मुताबिक Russia में ये वैक्सीन Free Of Cost यानी मुफ्त मिलेगी. इस पर आने वाली लागत को देश के स्वास्थ्य फंड से पूरा किया जाएगा. हालांकि दुनिया के दूसरे देशों में इसे कब और कितनी कीमत पर उपलब्ध करवाया जाएगा. ये फिलहाल तय नहीं हुआ है.
दुनिया के विशेषज्ञों को रूस की सफलता पर संदेह
राष्ट्रपति पुतिन दावा कर रहे हैं कि कोरोना संक्रमण से बचाने वाली दुनिया की पहली वैक्सीन पूरी तरह कारग़र है और ये सभी सुरक्षा मानकों पर खरी उतरी है । लेकिन Russia की इस वैक्सीन को कई देश शक की निगाह से भी देख रहे हैं. विशेषज्ञों को ये बात हज़म नहीं हो रही है कि जिस वैक्सीन को बनाने में अमूमन कई वर्ष लग जाते हैं. उसे Russia इतनी जल्दी लॉन्च करने की स्थिति में कैसे आ गया.
विशेषज्ञों के शक की एक बड़ी वजह ये है कि इस वैक्सीन के ट्रायल के बारे में उतनी जानकारी सार्वजनिक नहीं की गई है. जितनी अन्य देशों की वैक्सीन के बारे में उपलब्ध हैं. इस वैक्सीन को तैयार करने वाले इंस्टीट्यूट ने अबतक वैक्सीन के दूसरे और तीसरे फेज़ के आंकड़े सार्वजनिक नहीं किये हैं. विश्व स्वास्थ्य संगठन ने भी कहा है कि उसके पास Russia की वैक्सीन के सिर्फ़ फेज़ वन ट्रायल के आंकड़े हैं.
कोरोना वैक्सीन के ट्रायल का तीसरा चरण पूरा नहीं किया
दूसरी वजह ये है कि Russia के स्वास्थ्य मंत्रालय ने खुद माना है कि कोरोना वैक्सीन के तीसरे चरण का क्लीनिकल ट्रायल अभी पूरा नहीं हुआ है. किसी भी वैक्सीन के लिए तीसरे फेज़ का ट्रायल काफी अहम होता है जब हज़ारों लोगों पर लंबे वक्त तक वैक्सीन के प्रभाव की जांच की जाती है. दुनिया के दूसरे देश, तीसरे फेज में Vaccines के कम से कम 30 हज़ार वॉलंटियर्स पर ट्रायल कर रहे हैं. विश्व स्वास्थ्य संगठन भी पिछले हफ़्ते चेतावनी दे चुका है कि Russia को टेस्टिंग के परंपरागत तरीकों को छोड़कर वैक्सीन तैयार नहीं करनी चाहिए.
विश्व स्वास्थ्य संगठन ने दुनियाभर में क्लीनिकल ट्रायल से गुजर रही 25 वैक्सीन की लिस्ट तैयार की है. लेकिन इस लिस्ट में Russia की इस वैक्सीन का नाम नहीं है. अमेरिका के एक बड़े विशेषज्ञ ने तो यहां तक कह दिया था कि Russia के वैज्ञानिकों को वैक्सीन की घोषणा करने से पहले उसकी सही तरीके से टेस्टिंग करनी चाहिए. अमेरिका, कनाडा और ब्रिटेन की सरकारें, बाकायदा आधिकारिक बयान जारी करके आरोप लगा चुकी हैं कि Russia की सरकार से जुड़े Hackers, वैक्सीन रिसर्च की जानकारी चोरी करने की कोशिश कर रहे हैं. हालांकि, Russia ने इन आरोपों को ख़ारिज कर दिया था.
रूस ने कोरोना वैक्सीन का नाम स्पूतनिक रखा
ये वो सवाल हैं, जिनके सही-सही जवाब Russia नहीं दे रहा है. सबसे बड़ा सवाल ये है कि जब कोरोना वैक्सीन के तीसरे चरण के ट्रायल पूरे नहीं हुए थे तो Russia ने इसे लॉन्च करने में इतनी जल्दबाज़ी क्यों की ? कुछ जानकार इसे Russia के वैक्सीन राष्ट्रवाद का नाम भी दे रहे हैं. ये कुछ वैसा ही है जैसे अंतरिक्ष में मानव को भेजने और चंद्रमा पर इंसान के पहले कदम को लेकर Russia और अमेरिका के बीच होड़ लगी थी. वैसे एक दिलचस्प बात ये भी है कि Russia ने अपनी इस वैक्सीन का नाम, Sputnik V रखा है. ये नाम Russia के पहले सेटेलाइट स्पूतनिक से मिला है. जिसे Russia ने वर्ष 1957 में तब लॉन्च किया था. जब Russia और अमेरिका के बीच स्पेस रेस, चल रही थी.
ये भी देखें-

