इंदौर में भारतीय क्रिकेट के दिग्गज खिलाड़ी और पद्म भूषण सम्मान से सम्मानित सुनील गावस्कर ने इंदौर में संजय जगदाले के जीवन और क्रिकेट के प्रति उनके समर्पण पर आधारित किताब ‘संजय जगदाले: रग-रग में क्रिकेट’ का विमोचन किया। किरण वाईकर और डॉ. सुनील दुधाले द्वारा लिखी गई इस किताब में संजय जगदाले के क्रिकेट सफर, उनके अनुभवों और खेल के प्रति योगदान को समेटने का प्रयास किया गया है।विमोचन कार्यक्रम के दौरान सुनील गावस्कर ने संजय जगदाले से जुड़ी कई पुरानी यादें साझा कीं। वहीं, संजय जगदाले ने भी गावस्कर के साथ अपने अनुभवों और क्रिकेट से जुड़े संस्मरणों को याद किया। कार्यक्रम के दौरान संजय जगदाले ने मौजूदा क्रिकेट के स्वरूप पर भी अपनी राय रखी। उन्होंने टी-20 क्रिकेट को लेकर कहा कि उन्होंने टी-20 मैच नहीं देखे हैं और न ही इस प्रारूप में उनकी विशेष रुचि है। उन्होंने क्रिकेट में लाल गेंद के महत्व पर जोर देते हुए कहा कि एक समय लाल गेंद क्रिकेट की पहचान हुआ करती थी। लाल गेंद से बल्लेबाज और गेंदबाज, दोनों को अपनी प्रतिभा दिखाने का अवसर मिलता था। गेंदबाजों को जहां स्विंग और अन्य परिस्थितियों का फायदा मिलता था, वहीं बल्लेबाजों की तकनीक और धैर्य की भी परीक्षा होती थी, जगदाले ने मौजूदा सफेद गेंद के क्रिकेट पर टिप्पणी करते हुए कहा कि आज के खेल में सफेद गेंद बल्लेबाजों के लिए अधिक मददगार नजर आती है। उनके इस बयान से क्रिकेट के पारंपरिक स्वरूप और आधुनिक प्रारूपों के बीच अंतर को लेकर चर्चा सामने आई। किताब के लेखकों किरण वाईकर का कहना है कि इस पुस्तक के माध्यम से पाठकों को संजय जगदाले के जीवन, उनके अनुभवों और क्रिकेट से जुड़े महत्वपूर्ण पहलुओं को जानने का अवसर मिलेगा। किताब में ऐसे कई प्रसंग शामिल किए गए हैं, जो क्रिकेट में रुचि रखने वाले लोगों के लिए उपयोगी साबित हो सकते हैं लेखकों के मुताबिक, यह किताब विशेष रूप से युवा क्रिकेटरों को खेल की बारीकियों, अनुशासन, समर्पण और अनुभवों से सीखने में मदद करेगी। इस तरह यह पुस्तक न केवल संजय जगदाले के क्रिकेट जीवन को सामने लाने का प्रयास है, बल्कि नई पीढ़ी को क्रिकेट की परंपराओं और मूल्यों से जोड़ने की पहल भी है।