सिवनी जिले के केवलारी वन परिक्षेत्र में शनिवार को एक वयस्क बाघ का शव मिलने से वन विभाग में हड़कंप मच गया। यह मामला दूधिया सर्किल की अर्जुनझिर बीट के आरक्षित वन कक्ष क्रमांक 486 का है, जहां नियमित गश्त के दौरान वन कर्मचारियों की नजर मृत बाघ पर पड़ी। सूचना मिलते ही वरिष्ठ वन अधिकारी मौके पर पहुंचे और राष्ट्रीय बाघ संरक्षण प्राधिकरण (NTCA) के दिशा-निर्देशों के अनुसार जांच और अन्य आवश्यक कार्रवाई शुरू की गई।घटना की गंभीरता को देखते हुए NTCA के प्रतिनिधि अनिमेश चव्हाण भी मौके पर पहुंचे। कान्हा टाइगर रिजर्व से बुलाए गए डॉग स्क्वाड ने पूरे घटनास्थल का बारीकी से निरीक्षण किया, लेकिन किसी भी प्रकार की संदिग्ध गतिविधि या मानव हस्तक्षेप के संकेत नहीं मिले। इसके बाद पेंच टाइगर रिजर्व के वन्यजीव विशेषज्ञ डॉ. अखिलेश मिश्रा तथा वाइल्डलाइफ कंजर्वेशन ट्रस्ट (WCT) के डॉ. हमजा नदीम फारूकी ने शव का परीक्षण किया।प्रारंभिक जांच में डीएफओ गौरव मिश्रा ने बाघ की मौत का कारण दूसरे बाघ के साथ हुआ आपसी संघर्ष बताया है। शव पर नाखून और दांतों के गहरे घाव पाए गए, जो क्षेत्रीय वर्चस्व की लड़ाई की ओर संकेत करते हैं। हालांकि, अंतिम निष्कर्ष पोस्टमार्टम और फोरेंसिक जांच रिपोर्ट आने के बाद ही स्पष्ट हो सकेगा। जांच के लिए आवश्यक जैविक नमूने सुरक्षित रखे गए हैं।वन अधिकारियों के अनुसार मृत बाघ के सभी महत्वपूर्ण अंग, जैसे नाखून, दांत, मूंछ के बाल और चमड़ी सुरक्षित मिले हैं। इससे प्रथम दृष्टया शिकार या वन्यजीव तस्करी की आशंका नहीं मानी जा रही है। आवश्यक औपचारिकताओं और परीक्षण के बाद बाघ के शव का विधिवत अंतिम संस्कार कर दिया गया।गौरतलब है कि बाघों के बीच क्षेत्र और प्रभुत्व स्थापित करने को लेकर संघर्ष की घटनाएं समय-समय पर सामने आती रहती हैं। विशेष रूप से ऐसे वन क्षेत्रों में, जहां बाघों की संख्या बढ़ रही हो और उनका आवास एक-दूसरे से जुड़ता हो, इस प्रकार के संघर्ष स्वाभाविक माने जाते हैं। वन विभाग ने पूरे क्षेत्र में निगरानी बढ़ा दी है और आसपास के जंगलों में अन्य बाघों की गतिविधियों पर भी नजर रखी जा रही है, ताकि किसी भी असामान्य स्थिति का समय रहते पता लगाया जा सके।


