नई दिल्ली : भारत-अफगानिस्तान के बीच अहम बातचीत के लिए अफगानिस्तान सरकार के वरिष्ठ अधिकारी डॉ. अब्दुल्ला अब्दुल्ला (Dr Abdullah Abdullah) 6 अक्टूबर को चार दिन की अधिकारिक भारत यात्रा पर नई दिल्ली पहुंचेगे. अब्दुल्ला तालिबान (Taliban) के साथ पिछले साल सितंबर में दोहा में शुरू हुई शांति वार्ता में अफगान सरकार के प्रमुख प्रतिनिधि हैं.
वर्तमान जिम्मेदारी के बाद पहला दिल्ली दौरा
मौजूदा परिस्थितियों में यह उनकी पहली नई दिल्ली यात्रा है और इस दौरान वो भारत सरकार के शीर्ष अधिकारियों से मुलाकात कर सकते हैं. भारतीय विदेश विभाग के अधिकारी जेपी सिंह ने 12 सितंबर को दोहा में उनसे मुलाकात की थी तब वहां 30 देशों के प्रतिनिधि मौजूद थे.
आयोजन के दौरान भारतीय विदेश मंत्री डॉ. एस जयशंकर ने कहा था कि ‘अल्पसंख्यकों, महिलाओं और समाज के कमजोर वर्गों के हितों को संरक्षित किया जाना चाहिए इसी के साथ अफगानिस्तान और उनके पड़ोस में हिंसा के मुद्दे को भी प्रभावी ढंग से संबोधित किया जाना चाहिए.’
अफगान शांति वार्ता पर भारत का रुख
अफगान शांति प्रक्रिया को सेकर भारत की नीति यह है कि तालिबान से बातचीत के दौरान अफगानिस्तान की राष्ट्रीय संप्रभुता और क्षेत्रीय अखंडता का सम्मान होना चाहिए. ऐसे में जब अफगान शांति वार्ता काफी हद तक आगे बढ़ चुकी है, वहीं भारत भी अफगानिस्तान में अपनी पहुंच और पकड़ मजबूत बना चुका है. इससे पहले सितंबर में अफगान नेता मार्शल अब्दुल रशीद दोस्तम का दौरा हुआ, तब उन्होंने विदेश मंत्री जयशंकर और विदेश सचिव हर्ष श्रृंगला से मुलाकात की थी.
गौरतलब है कि भारत, अफगानिस्तान का प्रमुख विकास साझेदार है और उसने काबुल समेत पूरे देश में कई मूलभूत परियोजनाओं का निर्माण किया है. भारत ने वहां हेरात में दोस्ती का एक बांध भी बनाया है.
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