उपनयन और समावर्तन संस्कार ने बटुकों को बनाया वेद अध्ययन का अधिकारी अपने ज्ञान और संस्कार से सनातन परंपरा आगे बढ़ाएं: बागेश्वर महाराज बच्चों को मिलेगी वैदिक शिक्षा और सनातनी संस्कार
बागेश्वर धाम में वैदिक परंपरा का पुनर्जागरणछतरपुर । आध्यात्मिक चेतना का केंद्र बने सिद्ध पीठ बागेश्वर धाम में संचालित गुरुकुलम में सनातन वैदिक परंपराओं के अनुरूप बटुक ब्राह्मणों का उपनयन और समावर्तन संस्कार किया गया। बागेश्वर धाम जन सेवा समिति द्वारा संचालित सनातन वैदिक गुरुकुलम में काशी से पधारे विद्वान आचार्यों ने वैदिक विधि-विधान से बटुकों को संस्कारित किया। इन पवित्र संस्कारों के माध्यम से बालकों को न केवल वेद अध्ययन का अधिकारी बनाया गया बल्कि उन्हें सनातन धर्म की मूल शिक्षाओं, अनुशासन और जीवन मूल्यों से भी जोड़ा जा रहा है। इस अवसर पर बागेश्वर धाम पीठाधीश पं. धीरेंद्र कृष्ण शास्त्री ने बटुकों से स्नेहपूर्ण संवाद किया।
उन्होंने बच्चों को आशीर्वाद देते हुए कहा कि वे एकाग्रचित्त होकर अध्ययन करें और अपने ज्ञान व संस्कारों से गुरुकुलम तथा सनातन परंपरा का नाम उज्ज्वल करें। बनारस के यज्ञाचार्य राजा पांडे ने बताया कि गुरुकुलम का उद्देश्य है कि आने वाली पीढ़ी को आधुनिक शिक्षा के साथ-साथ वैदिक ज्ञान और संस्कृति की गहराई भी प्राप्त हो। उन्होंने बताया कि गुरुकुलम में अध्यनरत सभी बटुक ब्राह्मण का उपनयन और समावर्तन संस्कार किया गया।
गुरुकुलम में बच्चों को वेद, शास्त्र, संस्कृत भाषा, यज्ञ-विद्या और नैतिक शिक्षा प्रदान की जाएगी जिससे वे भविष्य में समाज का मार्गदर्शन करने योग्य बन सकें। यह पहल भारतीय संस्कृति के संरक्षण और संवर्धन की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम मानी जा रही है। इस आयोजन ने न केवल क्षेत्र में आध्यात्मिक ऊर्जा का संचार किया बल्कि यह संदेश भी दिया कि सनातन परंपराएं आज भी जीवंत हैं और नई पीढ़ी के माध्यम से निरंतर आगे बढ़ रही हैं।


